शाम को बिजली की किल्लत क्यों बढ़ रही है? क्या आगे महंगी हो सकती है बिजली?
देशभर में शाम के समय में बिजली की किल्लत बढ़ती जा रही है. अब इसके पीछे क्या कारण है और सोलर पावर, कोयले की कमी से इसपर कितना असर पड़ सकता है, इसके बारे में आप यहां से जान सकते हैं.

दिन में बिजली की ठीक रहती है, लेकिन शाम होते ही कई जगह बिजली की मांग बढ़ने लगती है. इसका असर अब बिजली की सप्लाई और कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. देश में बिजली की बढ़ती मांग, कोयले की कमी और सोलर पावर से जुड़ी एक बड़ी समस्या ने बिजली कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है.
हाल ही में गुजरात ने बिजली की कमी से बचने के लिए फैक्ट्रियों से शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच बिजली की खपत घटाने को कहा है. वहीं, देश में बिजली की मांग पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ी है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब देश में सोलर पावर का प्रोडक्शन बढ़ रहा है तो शाम के समय बिजली की किल्लत क्यों हो रही है? और क्या इसकी वजह से बिजली बिल बढ़ सकता है?
शाम में क्यों हो रही है कमी?
दिन में बिजली खूब रहती है और शाम में कमी हो जाती है, इसकी एक बड़ी वजह सोलर पावर है. दिन में धूप निकलने पर सोलर प्लांट बड़ी मात्रा में बिजली बनाते हैं. इससे बिजली की बढ़ जाती है और बाजार में बिजली की कीमत भी कम हो सकती है.
लेकिन सूरज ढलते ही सोलर पावर का प्रोडक्शन तेजी से घट जाता है. दूसरी तरफ, शाम को घरों में लाइट, पंखे, कूलर और AC चलने लगते हैं. बाजार, ऑफिस और फैक्ट्रियों में भी बिजली की खपत बनी रहती है. यानी जिस समय बिजली की जरूरत बढ़ती है, उसी समय सोलर से मिलने वाली बिजली कम होने लगती है.
क्यों बढ़ी परेशानी?
भारत में बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा कोयले से चलने वाले पावर प्लांट पूरा करते हैं. लेकिन कोयले के सीमित स्टॉक और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. कम बारिश का असर भी बिजली प्रोडक्शन पर पड़ा है. जलाशयों में पानी कम होने से पानी से बनने वाली बिजली का प्रोडक्शन कम हुआ है. ऐसे में शाम को जब सोलर बिजली नहीं होती तब दूसरे स्रोतों से मांग पूरी करना और मुश्किल हो जाता है.
कंपनियों को देने पड़ रहे ज्यादा पैसे?
जब बिजली की मांग सप्लाई से ज्यादा हो जाती है, तो बिजली वितरण कंपनियों को दूसरे स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ सकती है. ऐसे समय में उन्हें बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में बिजली के डे-अहेड मार्केट में औसत कीमत करीब 7.30 रुपए प्रति यूनिट रही. कुछ मुश्किल समय में बिजली खरीदने के लिए करीब 20 रुपए प्रति यूनिट तक चुकाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है. वहीं, अक्टूबर में बिजली एक्सचेंज पर कीमत 10 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई.
क्या महंगी हो सकती है बिजली?
बिजली की किल्लत लंबे समय तक बनी रहती है और कंपनियों को लगातार महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है तो बिजली की लागत बढ़ सकती है. इससे हो सकता है कि बिजली महंगी हो जाए. लेकिन आखिरी फैसला तो राज्य के टैरिफ नियम और नियामक आयोग का ही होगा.
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