बच्चों का आधार क्यों है जरूरी? UIDAI ने मम्मी-पापा की इमोशनल वीडियो शेयर कर समझाया
UIDAI के इमोशनल वीडियो में बच्चों के आधार एनरोलमेंट की अहमियत बताई गई है. मेले में परिवार से बिछड़े बच्चे की पहचान दर्ज जानकारी के जरिए उसके माता-पिता तक पहुंचाने में मदद मिलती है.

अगर आपके घर में भी छोटे बच्चे मौजूद हैं और उनका अभी तक आधार कार्ड नहीं बनवाया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. बच्चों के लिए आधार सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि यह मुश्किल वक्त में काम आने वाला एक ऐसा जरिया है, जिसकी मदद से किसी बच्चे के घर की पहचान होती है. इसी को लेकर UIDAI ने एक इमोशनल वीडियो के जरिए बताया है कि बच्चों की सही पहचान दर्ज होना मुश्किल समय में उनके परिवार तक पहुंचने में किस तरह मदद कर सकती है.
UIDAI के मुताबिक, माता-पिता को बच्चों का आधार समय पर बनवाने के साथ 5 और 15 साल की उम्र में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) भी कराना जरूरी है. सही समय पर अपडेट की गई पहचान बच्चे की सुरक्षा के साथ-साथ कई जरूरी कामों में भी मददगार साबित हो सकती है.
क्या है UIDAI की इमोशनल वीडियो की कहानी?
UIDAI ने एक ऐसी कहानी के जरिए बच्चों की पहचान सुरक्षित रखने की अहमियत समझाई है, जिसमें सुरेश नाम का एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ मेले में घूमने जाता है. लेकिन मेले में अचानक भीड़ बढ़ती है और एक झटके में सुरेश का हाथ अपने माता-पिता से छूट जाता है. देखते ही देखते कुछ ही पलों में बच्चा अपने परिवार से बिछड़ जाता है.
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शाम होते ही सुरेश रास्ते में पुलिस को अकेले मिलता है, लेकिन वह पुलिस के पूछने पर अपने घर का पता ठीक से नहीं बता पाता. इसके बाद उसे चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में रखा जाता है, जहां वह काफी समय तक अपने परिवार से दूर रहता है.
बच्चों का सही समय पर आधार एनरोलमेंट और मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) कराएँ।
— Aadhaar (@UIDAI) August 25, 2026
क्योंकि सही समय पर अपडेट की गई पहचान, मुश्किल घड़ी में अपनों तक पहुँचने का रास्ता बन सकती है।
आज की सही पहचान… कल अपनों तक पहुँचने का भरोसा।#Aadhaar #MBU #MandatoryBiometricUpdate #UIDAI pic.twitter.com/wbBk5BJvp5
आधार से कैसे मिला परिवार से बच्चा?
कुछ महीने बाद चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में आधार एनरोलमेंट की प्रोसेस शुरू होती है. इसी दौरान सुरेश का भी आधार एनरोलमेंट किया जाता है. उसके आधार रिकार्ड में दर्ज जानकारी की मदद से उसके परिवार से जुड़ी पहचान और पता सामने आता है.
इसके बाद संस्था की वार्डन पुलिस को सुरेश के एड्रैस की जानकारी देती है. पुलिस तुरंत पते के आधार पर सुरेश को लेकर उसके परिवार तक पहुंचती है और आखिरकार सुरेश अपने माता-पिता से दोबारा मिल जाता है.
बच्चों का आधार बनवाना क्यों है जरूरी?
- बच्चों की पहचान से जुड़े किसी भी जरूरी कामों में आधार का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- स्कूल और शिक्षा से जुड़े कई कामों में भी आधार की जरूरत पड़ सकती है.
- सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में भी आधार की काफी अहम भूमिका है.
- बच्चे के बड़े होने के साथ उसकी पहचान संबंधी जानकारी को अपडेट रखना बेहद जरूरी है.
- किसी मुश्किल वक्त में आधार में सही पहचान की जानकारी मददगार साबित हो सकती है.
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