ट्रैफिक चालान के नाम पर ठगी, मिनटों में साफ हो सकता है बैंक खाता, जानें कैसे बचना है
Traffic Challan Fraud: नकली ई चालान मैसेज से साइबर ठग लोगों को निशाना बना रहे हैं. फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही बैंक डिटेल्स और ओटीपी चुराकर खाता खाली किया जा सकता है. इन तरीकों से करें खुदका बचाव.

Traffic Challan Fraud: देश में सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत कई ट्रैफिक नियम बनाए गए हैं. इन नियमों तोड़ना महंगा पड़ता है. यह बात हम सब जानते हैं. अगर आप रोज कार या बाइक चलाते हैं. तो ई चालान का मैसेज आना आम बात है. सिग्नल जंप, ओवरस्पीड या नो पार्किंग जैसी छोटी गलती भी तुरंत रिकॉर्ड हो जाती है और मोबाइल पर नोटिफिकेशन पहुंच जाता है.
डिजिटल सिस्टम जहां लोगों को सुविधा मिली है. तो यहीं से साइबर ठगों को नया रास्ता मिल गया है. वह नकली ट्रैफिक चालान के नाम पर ऐसा जाल बिछा रहे हैं कि मिनटों में बैंक खाता साफ हो सकता है. असली और फर्जी मैसेज में फर्क करना भी काफी मुश्किल लग सकता है. पर थोड़ी समझदारी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. जान लीजिए कैसे बचना है इस फ्राॅड से.
लोगों को आ रहे ऐसे मैसेज
ई चालान सिस्टम ने ट्रैफिक मॉनिटरिंग को तेज और ऑटोमैटिक बना दिया है. कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करते हैं और नियम तोड़ते ही चालान जनरेट हो जाता है. इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर अपराधी फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. मैसेज में लिखा होता है कि आपके वाहन पर चालान बकाया है और तुरंत भुगतान न करने पर जुर्माना बढ़ जाएगा या गाड़ी सीज कर दी जाएगी. डर पैदा करना इनका पहला हथियार होता है.
ई-चालान के नाम पर ठगी
यह मैसेज दिखने में बिल्कुल असली लगते हैं. कई बार उसमें आपका वाहन नंबर, तारीख और रकम भी लिखी होती है. तो साथ में एक लिंक दिया जाता है. जो किसी संदिग्ध डोमेन पर ले जाता है. जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं. एक नकली वेबसाइट खुलती है जो सरकारी पोर्टल जैसी दिखती है. वहां आपसे वाहन नंबर, मोबाइल नंबर, ओटीपी और बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं. एक छोटी सी गलती और आपके खाते से पैसे निकल सकते हैं.
ऐसे करें बचाव
यहां सबसे जरूरी है घबराहट से बचना. कोई भी मैसेज आए, सीधे उस लिंक पर क्लिक न करें. असली चालान की पुष्टि केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही करें. आप mParivahan ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं या Parivahan Sewa की आधिकारिक वेबसाइट echallan.parivahan.gov.in पर जाकर वाहन नंबर डालकर स्टेटस चेक कर सकते हैं.
इन बातों का ध्यान रखें
ध्यान रखें पुलिस या आरटीओ कभी भी अनजान लिंक भेजकर तुरंत भुगतान करने का दबाव नहीं बनाते. किसी भी वेबसाइट पर ओटीपी, डेबिट कार्ड नंबर या बैंक डिटेल्स तभी डालें जब आपको उसके आधिकारिक होने का पूरा भरोसा हो. अगर शक हो तो संबंधित ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन पर संपर्क करें.
यह भी पढ़ें: किन लोगों को मिलता है कन्या सुमंगला योजना का लाभ? जानें योजना के नियम व शर्तें
Source: IOCL

























