GNIDA: ग्रेटर नोएडा में फ्लैट ले रहे हैं तो पहले जान लें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है, बिल्डरों और खरीदारों के लिए जरूरी खबर
Big decision of Supreme Court: ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अब वह अपनी किसी भी गलती का हर्जाना बिल्डरों और घर खरीदने वालों से नहीं वसूला जा सकता है.

Noida Real Estate News: सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को बेहद ही बड़ा झटका लगा है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने GNIDA को कड़े शब्दों में साफ रूप से कहा है कि अपनी किसी भी तरह की प्रशासनिक गलतियों या देरी का बोझ बिल्डरों और घर खरीदने वालों पर नहीं डाल सकते हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अपनी गलती का हर्जाना बिल्डरों और खरीदारों से किसी भी तरह से नहीं वसूला जा सकता है. तो वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में हड़कंप का माहौल देखने को मिल रहा है.
आखिर क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद जमीन अधिग्रहण और उस पर लगने वाले अतिरिक्त मुआवजे से जुड़ा था. जिसका सुप्रीम कोर्ट ने अब ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए GNIDA को कड़ी फटकार लगाई है. जानकारी के मुताबिक, प्राधिकरण ने किसानों को दिए जाने वाले बढ़े हुए मुआवजे की वसूली के लिए बिल्डरों पर भारी भरकम पेनल्टी लगा दी थी, जिसको लेकर देश की सबसे बड़ी कोर्ट ने अब इस फैसले को लेकर कार्यवाही की है.
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
तो वहीं, इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से सख्त से सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर प्राधिकरण ने समय पर नियमों का पालन नहीं किया या फिर किसी भी तरह से किसानों के साथ मुआवजे के विवाद को सुलझाने में देरी की तो, बिल्डरों और घर खरीदारों को उनके किए का जिम्मेदार नहीं ठहाराया जा सकता है.
इसके अलावा कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में यह भी कहा कि अपनी गलती का फायदा किसी भी संस्थान को उठाने का हक नहीं है. फिलहाल, कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से किसान, बिल्डरों के साथ-साथ घर खरीदने वाले लोगों को बेहद ही बड़ी राहत मिली है.
फैसले का रियल एस्टेट पर क्या पड़ा प्रभाव?
तो वहीं, कोर्ट द्वारा लिए गए इस फैसले से रिय एस्टेट बाजार में एक तरह से पारदर्शिता देखने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में डर का माहौल भी देखने को मिल रहा है. तो वहीं, सुप्रीट कोर्ट के इस फैसले के बाद से अब प्राधिकरण अपनी मनमानी नहीं कर सकेंगे और साथ ही बिल्डरों पर किसी भी तरह का दबाव बनाकर चार्ज नहीं बढ़ाया जा सकेगा.
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Source: IOCL


























