PM-FCT Scheme: क्या है पीएम फैमिली केयर ट्रैकर प्रोजेक्ट? जानें जन्म से लेकर जवानी तक ट्रैक होगा हर बच्चा
Child Welfare Scheme:केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम फैमिली केयर ट्रैकर शुरू किया है.यह डिजिटल सिस्टम जरूरतमंद परिवारों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद करेगा.

PM Family Care Tracker: अक्सर सरकारी योजनाओं का फायदा सही समय पर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है. कई बार डॉक्यूमेंट्स की कमी या कई अन्य गड़बड़ीयों के कारण लोग सरकारी सुविधाओं से दूर रह जाते हैं. आमतौर पर देखा जाता है कि गर्भवती महिला, छोटे बच्चे और नवजात शिशु को समय रहते स्वास्थ्य, पोषण और अन्य जरूरी सरकारी सेवाएं उन्हें नहीं मिल पाती है.
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका नाम पीएम फैमिली केयर ट्रैकर (PM-FCT) है. यह एक ऐसा डिजिटल सिस्टम प्रोजेक्ट है, जिसके जरिए जरूरतमंद लोगों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा समय रहते उपलब्ध कराना है. आइए जानते हैं पीएम फैमिली केयर ट्रैकर के बारें में विस्तार से.....
क्या है PM-FCT?
PM-FCT जिसे पीएम फैमिली केयर ट्रैकर के रूप में जाना जाता है. यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसके तहत बच्चे के जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक की उसकी पूरी जानकारी एक जगह जोड़कर रखा जाएगा. पीएम फैमिली केयर ट्रैकर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बच्चे की स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग का डेटा एक साथ जोड़ा जाएगा. यह जरूरतमंद लोगों पर लगातार नजर रखने में मदद करेगा, ताकि किसी को भी सहायता मिलने में देरी न हो.
PM-Family Care Tracker के फायदे
- अगर किसी बच्चे का पोलियो या कोई जरूरी टीका छूट जाता है, तो स्वास्थ्य विभाग को तुरंत इसकी सूचना मिल जाएगी.
- अगर कोई बच्ची चौथी क्लास तक पढ़ने के बाद पांचवीं क्लास में दाखिला नहीं लेती है, तो स्कूल और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अलर्ट किया जाएगा.
- कुपोषित से जूझ रहे बच्चों और देखभाल की जरूरत वाले बच्चों की पहचान भी की जाएगी.
- जरुरतमन्द परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद करना।
किन योजनाओं की जानकारी ट्रैक होगी?
- मातृत्व सहायता योजनाएं
- टीकाकरण कार्यक्रम
- पोषण योजनाएं
- शिक्षा से जुड़ी सहायता
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर में जन्म पंजीकरण संख्या को एक यूनिक पहचान के तौर में इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर बच्चे का रिकॉर्ड आसानी से ट्रैक किया जा सके.
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