Tax Rules: पति-पत्नी आपस में गिफ्ट करें शेयर तो क्या होगा, क्या लगेगा टैक्स? ITR के इन नियमों का रखें खास ध्यान
Tax Rules: क्या पति-पत्नी एक-दूसरे को शेयर गिफ्ट कर सकते हैं? जानें शेयर गिफ्ट पर टैक्स के नियम, क्लबिंग प्रावधान, ITR में इसकी एंट्री और किन बातों का रखना होगा ध्यान.

Tax Rules: पति-पत्नी के बीच पैसे या शेयर गिफ्ट करना आम बात है. कई लोग टैक्स प्लानिंग या निवेश का सोचकर भी अपने लाइफ पार्टनर को शेयर ट्रांसफर कर देते हैं. लेकिन ऐसा करने से पहले आयकर के नियमों को समझना बेहद जरूरी है. क्योंकि कई मामलों में शेयर गिफ्ट करने पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन उससे होने वाली कमाई पर टैक्स देना पड़ सकता है.
क्या शेयर गिफ्ट करने पर टैक्स लगता है?
अगर पति अपनी पत्नी को या पत्नी अपने पति को शेयर गिफ्ट करती है तो शेयर ट्रांसफर के समय कोई टैक्स नहीं लगता. आयकर कानून के अनुसार, पति-पत्नी के बीच दिया गया गिफ्ट टैक्स-फ्री माना जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आगे होने वाली पूरी कमाई भी टैक्स से मुक्त होगी.
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कमाई पर लागू होता है क्लबिंग नियम
अगर गिफ्ट में मिले शेयर से डिविडेंड मिलता है या उन्हें बेचने पर कैपिटल गेन होता है तो कई मामलों में इनकम टैक्स एक्ट की क्लबिंग प्रोविजन लागू हो सकती हैं. इसका मतलब है कि गिफ्ट किए गए शेयर से होने वाली आय को उस व्यक्ति की आय में जोड़ा जा सकता है, जिसने शेयर गिफ्ट किए थे. यानी टैक्स की जिम्मेदारी गिफ्ट देने वाले पर आ सकती है. जैसे कि अगर पति ने पत्नी को शेयर गिफ्ट किए और उन शेयरों से कमआई हुई तो वो आय पति की टैक्सेबल इनकम में जोड़ी जा सकती है.
ITR भरते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आपने अपने जीवनसाथी को शेयर गिफ्ट किए हैं, तो ITR दाखिल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
- शेयर गिफ्ट का रिकॉर्ड रखें
- Gift Deed बनवाएं
- शेयर बेचने पर कैपिटल गेन का हिसाब रखें
- क्लबिंग नियम चेक करें
- टैक्स एक्सपर्ट से बात करें
क्या बाद में होने वाला मुनाफा भी क्लब होगा?
अगर गिफ्ट में मिले शेयरों से होने वाली पहली आय को निवेश करके आगे कोई नई कमाई होती है तो हमेशा क्लबिंग नियम लागू नहीं होते हैं. यानी बाद की आय का टैक्स अलग तरीके से तय हो सकता है.
टैक्स बचाने के लिए जल्दबाजी
कई लोग सिर्फ टैक्स बचाने के लिए से शेयर अपने पार्टनर के नाम ट्रांसफर कर देते हैं. लेकिन बिना नियम समझे ऐसा करना बाद में टैक्स नोटिस या एक्स्ट्रा टैक्स का कारण बन सकता है. इसलिए कोई भी बड़ा निवेश या ट्रांसफर करने से पहले टैक्स नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए.

























