देरी से बीमा क्लेम किया तो क्या होगा, क्या नहीं मिलेंगे पैसे? हेल्थ इंश्योरेंस में 'टाइम लिमिट' का फंडा समझें
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस हम सभी के लिए बहुत अहमियत रखता है. लेकिन कई बार हम इसे क्लेम करने में थोड़ी देरी कर देते हैं, जिसकी वजह से नुकसान भी भुगतना पड़ता है.

Health Insurance Claim: हेल्थ इंश्योरेंस हम सभी के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन कई बार जब कोई करीबी या हम खुद बीमार होते हैं तब क्लेम करने में देरी हो जाती है. इसका मतलब क्या हमें पैसा नहीं मिलेगा? ऐसा नहीं है, हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक नया फैसला किया है, जिसके तहत अब क्लेम रिजेक्शन का कारण देरी नहीं होगा. देर हो जाने के बाद भी सही दस्तावेज जमा कर आप इंश्योरेंस का पैसा ले सकते हैं.
बॉम्बे हाईकोर्ट का नया फैसला
अपने इस फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि, 'बीमा कंपनियां केवल इस आधार पर अस्पताल में भर्ती होने के दावों को खारिज नहीं कर सकती है, कि इसके लिए क्लेम करने में थोड़ी देरी हो गई है.' कोर्ट ने कहा कि इस तरह की पाबंदियां पॉलिसीधारक के उन लाभों को प्राप्त करने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं जिनके वो हकदार हैं.
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'टाइम लिमिट' का फंडा समझें
बीमा कंपनियां अक्सर देरी से क्लेम मिलने के कारण बिना किसी जांच- पड़ताल के ही उसे रिजेक्ट कर दिया करती हैं. जिसके कारण लोगों के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था. बताते हैं इसके अलावा और कंपनियां क्या- क्या करती हैं.
- यदि आपने बीमार होने के बाद भी काफी समय के बाद हेल्थ इंश्योरेंस के लिए क्लेम किया है, तो ये दावा खारिज होने के पूरे चांस होंगे.
- हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी सारे दस्तावेजों और क्लेम की पुष्टि करने के लिए गहराई से जांच करेगी, जिससे क्लेम मिलने में समय लग सकता है.
- क्लेम में देरी की वजह से सबूतों की कमी हो सकती है, आपको दस्तावेजों को इकट्ठा करके रखना मुश्किल हो सकता है.
- कई कंपनियां 24 से 72 घंटों का समय देती हैं, इसके बाद यदि क्लेम करते हैं तो इसे रिजेक्ट किया जा सकता है.
क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचाएं?
यदि आपका क्लेम किसी भी वजह से रिजेक्ट होने की उम्मीद है, तो उससे पहले ही उसे बचाने की कोशिश करें. आइये बताते हैं कि इस समय पर आप क्या कर सकते हैं.
- सबसे पहले तो क्लेम फॉर्म को अच्छी तरह से पढ़कर भरें. कई लोग प्रपोजल फॉर्म को इंश्योरेंस एजेंट से ही भरवा लेते हैं और बिना देखे बस साइन कर देते हैं, लेकिन ये गलत तरीका है.
- सही फैक्ट्स दें, जिससे कि आपको क्लेम मिलने में कोई परेशानी ना हो. खुद से, परिवार से और बीमारी से जुड़ी सारी जानकारी सही से दें.
- अपनी पॉलिसी के फीचर्स के बारे में जानें, कि इसके क्या नियम हैं, क्लेम सैटलमेंट कैसे होगा और टर्म्स एंड कंडीशंस को भी अच्छी तरह से क्लेम करने से पहले जान लें.
- कंपनी की तरफ से आए इनवेस्टिगेटर के साथ को-ऑपरेट करें. वो जो भी जानकारी या दस्तावेज मांग रहा है वो सही- सही दें.
- इंश्योरेंस कंपनी में अपने सही दस्तावेज सबमिट करें, कोई भी फर्जी या अधूरा दस्तवेज सबमिट करने से बचें.
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यदि आप क्लेम करने से पहले ही इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका क्लेम कभी रिजेक्ट ही नहीं होगा. ऐसे में जब भी ऐसी स्थिति आए तो आपको शांत दिमाग से और सही निर्णय लेना है. ना कि जल्दबाजी में क्लेम करना है या फिर दस्तावेजों के साथ कोई छेड़खानी नहीं करना है.
Source: IOCL


























