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रेलवे ट्रैक के बीच लगाए जा रहे सोलर पैनल, अब कभी नहीं होगी एनर्जी की कमी

इस सोलर पैनल सिस्टम की क्षमता 15 किलोवाट पीक (kWp) है. ये पैनल रोजाना 960 यूनिट बिजली पैदा कर सकते हैं और इसकी पावर डेंसिटी 240 किलोवाट पीक प्रति किलोमीटर है.

भारतीय रेलवे ने पर्यावरण को बचाने और क्लीन ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए नया और अनोखा कदम उठाया है. दरअसल, बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) में पहला ऐसा सोलर पैनल सिस्टम लगाया गया है, जो रेलवे ट्रैक के बीच में फिट किया गया है. यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसे BLW की वर्कशॉप लाइन नंबर 19 पर शुरू किया गया है. इस प्रोजेक्ट में 70 मीटर लंबे ट्रैक पर 28 सोलर पैनल लगाए गए, जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बने हैं. इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसे आसानी से हटा सकते हैं और इससे ट्रेनों की आवाजाही में भी रुकावट नहीं आती है.

कितना खास है यह प्रोजेक्ट?

इस सोलर पैनल सिस्टम की क्षमता 15 किलोवाट पीक (kWp) है. ये पैनल रोजाना 960 यूनिट बिजली पैदा कर सकते हैं और इसकी पावर डेंसिटी 240 किलोवाट पीक प्रति किलोमीटर है. इसका मतलब यह है कि यह सिस्टम न सिर्फ बिजली पैदा करने में कारगर है, बल्कि रेलवे के लिए किफायती और पर्यावरण के लिए फायदेमंद विकल्प भी है. भारतीय रेलवे के पास 1.2 लाख किलोमीटर लंबा ट्रैक नेटवर्क है और अगर यह प्रोजेक्ट पूरे देश में लागू होता है तो हर साल प्रति किलोमीटर 3.5 लाख यूनिट बिजली बनाई जा सकती है. इससे रेलवे की बिजली की जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी.

ये दिक्कतें होंगी दूर

सबसे अच्छी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए अलग से जमीन खरीदने की जरूरत नहीं है. रेलवे ट्रैक के बीच की खाली जगह का इस्तेमाल करके ये सोलर पैनल लगाए गए हैं. इससे न सिर्फ जमीन की बचत हो रही है, बल्कि रेलवे का खर्चा भी कम हो रहा है.

इन दिक्कतों से कैसे निपटा रेलवे?

इस प्रोजेक्ट को शुरू करने में रेलवे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी तकनीकी टीम ने इनका समाधान निकाल लिया. दरअसल, ट्रेनों के गुजरने से ट्रैक पर काफी कंपन होता है, जो सोलर पैनलों को नुकसान पहुंचा सकता था. इस समस्या से बचने के लिए रेलवे ने रबर माउंटिंग पैड का इस्तेमाल किया, जो कंपन कम करते हैं और पैनलों को सुरक्षित रखते हैं. वहीं, सोलर पैनलों को मजबूती से ट्रैक पर फिक्स करना भी चुनौती थी. इसके लिए पैनलों को एपॉक्सी एडहेसिव (एक तरह का मजबूत गोंद) से कंक्रीट स्लीपरों पर चिपकाया गया. इससे न सिर्फ पैनल मजबूती से टिके रहते हैं, बल्कि अतिरिक्त क्लैम्प्स की जरूरत भी नहीं पड़ी.

सेफ्टी और सिक्योरिटी का भी रखा ध्यान

रेलवे ट्रैक के आसपास धूल और मलबा जमा होना आम बात है, जो सोलर पैनलों की कार्यक्षमता को कम कर सकता है. इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे ने नियमित सफाई की व्यवस्था की है, ताकि पैनल हमेशा साफ रहें और बेहतर तरीके से काम करें. सोलर पैनलों को चोरी या नुकसान से बचाने के लिए रेलवे ने CCTV कैमरों की मदद ली है. ये कैमरे 24 घंटे निगरानी करते हैं, जिससे पैनल सुरक्षित रहते हैं. रेलवे ट्रैक पर समय-समय पर रखरखाव का काम होता है. ऐसे में सोलर पैनलों को हटाना जरूरी हो सकता है. इसके लिए पैनलों को चार स्टेनलेस स्टील (SS) एलन बोल्ट्स की मदद से जोड़ा गया है, जिससे इन्हें आसानी से हटाया और दोबारा लगाया जा सकता है.

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