ITR तो भर दिया, अब रिफंड कब आएगा? इसके लिए क्या हैं नियम
Income Tax Refund: ITR फाइल करने के बाद रिफंड कब मिलेगा? जानें आयकर विभाग के नियम, प्रोसेसिंग में कितना समय लगता है, स्टेटस कैसे चेक करें और किन कारणों से रिफंड अटक सकता है.

Income Tax Refund: अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन साल 2026-27) के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर दिया है और आपकी टैक्स देनदारी से ज्यादा टैक्स पहले ही कट चुका है या जमा हो चुका है तो अब अगला सवाल यै है कि रिफंड कब मिलेगा?
आयकर विभाग आईटीआर की जांच पूरी होने के बाद करदाताओं के बैंक खाते में रिफंड ट्रांसफर करता है. हालांकि, ये सभी के लिए एक ही तारीख पर नहीं आता. रिफंड मिलने का समय आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग, डॉक्यूमेंट्स और जांच पर डिपेंड करता है.
कब मिलता है ITR रिफंड?
आमतौर पर अगर आईटीआर सही तरीके से भरा गया है और उसमें कोई गलती नहीं है तो ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू होती है. प्रोसेसिंग पूरी होने पर रिफंड सीधे बैंक खाते में भेज दिया जाता है. हाल के सालों में कई टैक्सपेयर्स को 7 से 30 दिनों के भीतर रिफंड मिल जाता है. हालांकि, कुछ मामलों में इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है.
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रिफंड मिलने के लिए कौन-सी शर्तें जरूरी हैं?
रिफंड तभी मिलेगा, जब आपकी ओर से जमा किया गया टैक्स वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा हो. आईटीआर अच्छे से फाइल किया गया हो और रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन पूरा हो गया हो. साथ ही बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड और पैन से लिंक हो. इतना ही नहीं रिटर्न की प्रोसेसिंग में कोई गड़बड़ी भी नहीं मिलनी चाहिए.
किन कारणों से रिफंड में देरी हो सकती है?
- ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया हो
- बैंक खाते की जानकारी गलत हो
- पैन और बैंक खाते का मिलान न होना
- टीडीएस, फॉर्म 26AS या AIS में अंतर होना
- रिटर्न में अधूरी जानकारी
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क्या रिफंड पर ब्याज भी मिलता है?
अगर आयकर विभाग देरी से रिफंड देते हैं और करदाता इसके लिए पात्र है तो आयकर अधिनियम की धारा 244A के तहत रिफंड पर ब्याज भी दिया जा सकता है. हालांकि, ये हर मामले में लागू नहीं होता है और इसके लिए भी शर्तें होती हैं.
रिफंड जल्दी लेने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि रिफंड जल्द मिले, तो इन बातों का ध्यान रखें कि ITR भरने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन करें. सही बैंक खाता नंबर और IFSC दर्ज करें और बैंक खाते को प्री-वैलिडेट रखें. इतना ही नहीं फॉर्म 6AS, AIS और टीडीएस का मिलान करने के बाद ही आईटीआर फाइल करें. ध्यान दें, रिटर्न में गलत जानकारी देने से बचें.
























