जेनरल वार्ड में रखकर लगाया ICCU का चार्ज, अब देने होंगे 2 लाख
जेनरल वार्ड में एडमिट मरीज से ICCU का चार्ज लेने पर पश्चिम बंगाल कंज्यूमर कोर्ट ने अस्पताल को 2 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया. साथ ही 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये केस खर्च भी देना होगा

मरीज को अस्पताल में जनरल वार्ड का बेड मिला, लेकिन बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए. जिस बेड पर मरीज को रखा गया था, उसके बजाय बिल में ICCU का चार्ज जोड़ दिया गया. डिस्चार्ज के लिए 2 लाख रुपये भी देने पड़े. मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा तो अस्पताल की बिलिंग पर सवाल उठे और अब कोर्ट ने पैसा लौटाने को बोल दिया है.
ये मामला मई 2021 का है. अनिंद्य चक्रवर्ती को 1 मई की रात में इस्पात को-ऑपरेटिव हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. वो 6 मई तक अस्पताल में रहे. चक्रवर्ती का कहना था कि उनके परिवार ने वैलिड स्वास्थ्य साथी कार्ड दिया था, लेकिन अस्पताल ने इसका फायदा देने से इनकार कर दिया. मरीज के अनुसार, उन्हें जनरल वार्ड में रखा गया था. इसके बावजूद अस्पताल के बिल में ICCU के बेड का चार्ज लगाया गया. डिस्चार्ज के समय 2 लाख रुपये देने पड़े.
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रिकॉर्ड में सामने आया अंतर
मामले की सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के कंज्यूमर कोर्ट ने डिस्चार्ज समरी और आखरी बिल की जांच की. कोर्ट ने देखा कि रिकॉर्ड में मरीज के लिए जेनरल बेड दर्ज था, जबकि बिल में ICCU बेड का चार्ज लिया गया था. कोर्ट ने इसे गलत बिलिंग और गलत तरीके से बिल लेना माना. कोर्ट ने ये भी कहा कि अस्पताल के बिल में इलाज और मरीज के रिकॉर्ड के अनुसार सही जानकारी होनी चाहिए.
अस्पताल की तरफ से कहा गया कि कोरोना महामारी के दौरान जेनरल वार्डों को जरूरत के हिसाब से ICU में बदला गया था. अस्पताल ने ये भी कहा कि डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में बेड से जुड़ी जानकारी गलती से दर्ज हो गई थी. राज्य कोर्ट ने इस दलील को पक्का सबूत के बिना मानने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जेनरल वार्ड को ICU में बदले जाने की बात को साबित करने के लिए अस्पताल ने कोई पक्का सबूत नहीं दिए.
स्वास्थ्य साथी को लेकर भी राहत
कोर्ट ने मरीज की इस शिकायत को भी माना कि उसे स्वास्थ्य साथी कार्ड का फायदा नहीं दिया गया. कोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत मरीज खुद पैसे नहीं देता, लेकिन सरकार अस्पताल को पेमेंट करती है. इसलिए मरीज और अस्पताल के बीच कस्टमर और सेवा देने वाले का रिश्ता बनता है.
राज्य कोर्ट ने जिला कंज्यूमर कोर्ट का 28 मार्च 2024 का फैसला रद्द कर दिया. अस्पताल और उसके चेयरमैन को 2 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया गया है. इसके अलावा 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे. कोर्ट ने इन सभी आदेशों का पालन 25 अगस्त 2026 से आठ हफ्ते के अंदर करने को कहा है.






















