बैंक खाते से कट रहे हैं पैसे? इन छिपे शुल्कों से ऐसे बचाएं अपनी बचत
सेविंग्स अकाउंट में MAB, ATM, डेबिट कार्ड और SMS जैसे शुल्क आपकी बचत घटा सकते हैं. बैंक की चार्ज लिस्ट जांचें, पुराने खाते बंद करें और गैरजरूरी फीस से बचें. खाते की निगरानी करते रहें और नियम समझें.

सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना आसान लगता है, लेकिन न्यूनतम बैलेंस, ATM, डेबिट कार्ड और SMS जैसी सेवाओं के शुल्क धीरे-धीरे आपकी बचत कम कर सकते हैं. कुछ आसान सावधानियों से इन खर्चो को नियंत्रित किया जा सकता है.
कई लोगों के लिए बैंक का सेविंग्स अकाउंट सिर्फ पैसे रखने की जगह नहीं, बल्कि सैलरी, बिल भुगतान और रोजमर्रा के खर्चो का मुख्य जरिया होता है. लेकिन क्या आपको पता है कि खाते में मौजूद रकम पर नजर न रखना भी महंगा पड़ सकता है? बैंकिंग से जुड़े कुछ शुल्क सीधे नजर आते हैं, जबकि कुछ छोटी-छोटी कटौतियों के रूप में सामने आते हैं. ऐसे में अपने खाते की शर्तों और चार्जेस को समझना जरूरी हो जाता है.
सही सेविंग्स अकाउंट चुनना जरूरी
खाता खोलते समय सिर्फ ब्याज दर या बैंक का नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. सबसे पहले यह देखना चाहिए कि खाते में न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी है या नहीं और अलग-अलग सेवाओं के लिए कितना शुल्क लिया जाता है. BSBD उन ग्राहकों के लिए एक विकल्प है जो न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता से बचना चाहते हैं. RBI के नियमों के तहत ऐसे खातों में निर्धारित बुनियादी सुविधाएं बिना न्यूनतम बैलेंस की शर्त के उपलब्ध कराई जाती हैं.
वहीं, कुछ सामान्य सेविंग्स अकाउंट में बैंक द्वारा तय (MAB) बनाए रखना पड़ सकता है. इसकी शर्त पूरी न होने पर शुल्क लग सकता है. RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार बैंकों को न्यूनतम बैलेंस और उससे जुड़े शुल्क की जानकारी ग्राहकों को पारदर्शी तरीके से देनी होती है.
MAB पर रखें नजर
अगर आपके खाते में न्यूनतम औसत बैलेंस की शर्त है, तो महीने के अलग-अलग दिनों में खाते में मौजूद रकम पर ध्यान देना जरूरी है. सिर्फ महीने के आखिरी दिन पर्याप्त पैसा रखना हमेशा पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि बैंक औसत बैलेंस के आधार पर गणना कर सकता है. इसलिए बड़ी रकम निकालने या खाते का बैलेंस काफी कम करने से पहले अपने बैंक की MAB शर्त जरूर जांच लें.
ATM और डेबिट कार्ड के चार्ज भी समझें
ATM से तय मुफ्त लेनदेन की सीमा पार करने के बाद अतिरिक्त शुल्क लग सकता है. इसी तरह डेबिट कार्ड पर सालाना शुल्क भी बैंक और कार्ड के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. इसलिए ऐसा कार्ड रखने का कोई फायदा नहीं है जिसकी सुविधाओं का आप इस्तेमाल ही नहीं करते. SMS अलर्ट जैसी अतिरिक्त सेवाओं के शुल्क की जानकारी भी अपने बैंक के चार्ज शेड्यूल से ली जा सकती है.
खाते में जरूरत से ज्यादा पैसा न छोड़ें
बचत खाते में रोजमर्रा की जरूरत से बहुत ज्यादा रकम लंबे समय तक पड़ी रहने पर उस पैसे की बेहतर कमाई का मौका छूट सकता है. ऐसे में बैंक की स्वीप इन या फलेक्सी डिपोजिट सुविधा देखी जा सकती है, जिसमें निर्धारित सीमा से ऊपर की रकम FD जैसे विकल्प में जा सकती है और जरूरत पड़ने पर वापस उपलब्ध हो सकती है.
पुराने बैंक खातों की भी करें जांच
नौकरी या कॉलेज बदलने के बाद कई लोगों के पुराने सैलरी अकाउंटस इस्तेमाल में नहीं रहते. ऐसे खातों को यूं ही छोड़ने के बजाय उनकी स्थिति और लागू शुल्क की समीक्षा करनी चाहिए. अगर खाते की जरूरत नहीं है, तो बैंक की प्रक्रिया के अनुसार उसे बंद करना एक विकल्प हो सकता है. RBI के अनुसार किसी खाते में ग्राहक की ओर से दो साल तक कोई लेनदेन न होने पर उसे डोरमेंट श्रेणी में रखा जा सकता है.
तीन खातों का तरीका हो सकता है उपयोगी
जिन लोगों के पास कई बैंक खाते हैं, वे पैसों को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से व्यवस्थित कर सकते हैं—एक खाते में सैलरी और जरूरी भुगतान, दूसरे में रोजमर्रा के खर्च और तीसरे में आपातकालीन बचत. हालांकि बहुत ज्यादा खाते रखने से अलग-अलग MAB और शुल्क को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है.
खाते को शुल्क से बचाने के लिए ये काम करें
- अपने बैंक का लेटेस्ट स्केडयूस ओफ चार्ज जरूर पढ़ें.
- MAB की शर्त और पेनेंलटी को समझें.
- पुराने और बेकार खातों की समीक्षा करें.
- जहां संभव हो, ई- स्सेटमेंट का इस्तेमाल करें.
- डेबिट कार्ड के एनयुल फीस की जांच करें.
- ATM की फरी ट्रांसजेशन लिमिट का ध्यान रखें.
- मोबाइल बैंकिंग ऐप से नियमित रूप से खाते की निगरानी करें.
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