क्या घर का सोना बैंक में रखना सही है? पहले समझ लें गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, नहीं तो पछताना पड़ेगा
Gold Scheme: गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में आप अपने सोने को बैंक में जमा कर उस पर ब्याज कमा सकते हैं. हालांकि, इसमें आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता हैं. जानते हैं जरूरी बातें.

- गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में सोना जमा कर पाएं ब्याज।
- योजना में 2025 के बाद शॉर्ट टर्म डिपॉजिट प्रमुख।
- शुद्धता जांच में सोने का वजन घट सकता है।
- गहनों का भावनात्मक जुड़ाव, पिघलाना कठिन होता है।
- मेकिंग चार्ज हटने से वैल्यू में नुकसान होता है।
Gold Monetization Scheme: गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) लोगों को अपने घर या लॉकर में रखे सोने से कमाई का मौका देती हैं. जिसमें आपको जमा सोने पर ब्याज मिलता है. हालांकि, इस स्कीम को यूज करना इतना भी आसान नहीं है.
बहुत से लोगों का अपने सोने के गहनों के साथ भावनात्मक और पारिवारिक रिश्ता होता हैं. आइए जानते हैं, आखिर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम क्या है और कैसे काम करता है?
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में आप अपने घर में रखे सोने को बैंक में जमा करके उस पर ब्याज कमा सकते हैं. इसमें गहने, सिक्के या गोल्ड बार जमा किए जाते हैं. बैंक इस पर तय ब्याज देता है.
नियमों के अनुसार, समय पूरा होने पर आपको उस वक्त की कीमत के हिसाब से पैसा या सोना वापस लौटाया जाता है. यानी कि इस स्कीम में आप घर पर पड़े सोने को बैंक में जमा करके ब्याज कमा सकते हैं.
स्कीम में किया गया नया बदलाव
सरकार ने इस योजना को और बेहतर बनाने के लिए इसके ढांचे में कुछ बदलाव किए हैं. मार्च 2025 के बाद से निवेशक मुख्य रूप से शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) विकल्प का ही इस्तेमाल कर सकते हैं.
स्कीम के नुकसान
1. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत सोने की शुद्धता को जांचने के लिए इसे फायर एसेइंग टेस्ट से गुजरना पड़ता है. जिसमें सोने को पिघलाया जाता है. जिसमें अशुद्धियां कम होने से सोने का वजन घट सकता है.
2. भारतीय निवेशकों के लिए सोना सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं है. इससे भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव भी होता है. ऐसे में सोने को पिघलाने वाली बात कई परिवार स्वीकार नहीं करते हैं. कई परिवार में सोने के गहने विरासत और लगाव का पहचान होते हैं.
3. इस स्कीम में मेकिंग चार्ज हटाकर सोने का वैल्यू लगाया जाता है. यानी कि अगर आपने गहनों पर 15 से 20 प्रतिशत का मेकिंग चार्ज दिया हैं तो, आपको इन पैसों का सीधा नुकसान होगा.
4. स्कीम में लॉन्ग टर्म डिपॉजिट्स में यह लंबे समय तक लॉक रहता है. यानी इसे जल्दी निकालना आसान नहीं है. साथ ही नियम तोड़ने पर जुर्माना भी वसूला जाता है.
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Source: IOCL

























