Smoking Health Claim: स्मोकिंग की आदत छुपाई तो नहीं मिलेगा क्लेम, हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय 'सच' बताना क्यों है जरूरी?
Smoking News: अगर आप कभी-कभी सिगरेट पीते हैं या सिर्फ सोशल गैदरिंग में स्मोकिंग करते हैं, तब भी हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यह जानकारी छिपाना आपको महंगा पड़ सकता है.

- हेल्थ इंश्योरेंस में स्मोकिंग की हर जानकारी देना आवश्यक है।
- कभी-कभार की स्मोकिंग भी कंपनी को बतानी बहुत ज़रूरी है।
- बीमा कंपनियां प्रीमियम हेतु स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करती हैं।
- पुरानी बीमारी, मेडिकल रिपोर्ट छुपाना महंगा पड़ सकता है।
Health Insurance News: कई लोग मानते हैं कि अगर वह कभी-कभार सिगरेट पीते हैं तो उन्हें खुद को 'स्मोकर' नहीं मानना चाहिए, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का नजरिया इससे अलग हो सकता है. यही वजह है कि हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या कभी-कभार की जाने वाली स्मोकिंग भी कंपनी को बतानी जरूरी है? और अगर नहीं बताया तो क्या क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?. इसको लेकर एक्सपर्ट्स का क्या है कहना समझिए.
एक्सपर्ट ने क्या कहा ?
एक बड़ा सवाल ये है कि क्या कभी-कभार स्मोकिंग करने वालों को भी बताना चाहिए? पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट के मुताबिक, इंश्योरेंस कंपनी को हर जानकारी सच-सच बतानी चाहिए. उन्होंने कहा, अगर आप पहले से स्मोकिंग करते हैं तो यह जानकारी जरूर दें. कंपनी के लिए यह मायने नहीं रखता कि आप कभी-कभी पीते हैं या रोजाना. जरूरी यह है कि आपने सही जानकारी दी है या नहीं'. उन्होंने आगे कहा, हेल्थ इंश्योरेंस में 'उतना ही बताना है जितना पूछा गया है' वाला नियम नहीं चलता. यहां सच्चाई सबसे ज्यादा जरूरी होती है.
इंश्योरेंस कंपनी को स्मोकिंग से क्या लेना देना?
असल में इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम तय करते समय व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम यानी हेल्थ रिस्क का आकलन करती हैं. इस दौरान स्मोकिंग को कई गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह माना जाता है. बस यही कंपनी के लिए जानना जरूरी होता है कि आवेदक तंबाकू या निकोटीन का सेवन करता है या नहीं.
झूठी मेडिकल रिपोर्ट में होता है बड़ा जोखिम
कई बार लोग ऑफिस से छुट्टी लेने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट या मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल कर लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसी रिपोर्ट बाद में परेशानी खड़ी कर सकती है. अगर किसी दस्तावेज में बीमारी का रिकॉर्ड मौजूद है और आपने इंश्योरेंस आवेदन में उसका जिक्र नहीं किया है, तो कंपनी सवाल उठा सकती है, क्योंकि मेडिकल रिकॉर्ड को दस्तावेजी सबूत माना जाता है.
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय क्या करें?
सबसे गौर करने वाली बात यह कि प्रपोजल फॉर्म ध्यान से पढ़ें. इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए फॉर्म में स्मोकिंग और ड्रिंकिंग की सही जानकारी दें. आवेदन करते समय पुरानी बीमारियां न छुपाएं, मेडिकल रिपोर्ट्स सही जमा करें. अगर किसी जानकारी को लेकर संदेह हो तो कंपनी से लिखित स्पष्टीकरण लें.
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