बिजली मीटर रीडिंग गलत आ रही है? तो ऐसे करें शिकायत
Electricity Bill Complaint: बिजली बिल ज्यादा आ रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें. गलत मीटर रीडिंग या सिस्टम एरर हो सकता है. तुरंत शिकायत दर्ज करें, जांच के बाद बिल सही किया जा सकता है.

Electricity Bill Complaint: सबके घर में बिजली का इस्तेमाल होता है. लगभग हर जरूरी चीज इसी से चलती है. महीने भर में जितनी खपत होती है. उसी हिसाब से बिल आता है और लोग उसे नियमित भरते भी हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इस्तेमाल कम होता है और बिल अचानक ज्यादा आ जाता है. यही वो जगह है जहां गड़बड़ी की संभावना होती है.
कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार गलती आपकी नहीं होती. मीटर रीडिंग, सिस्टम एरर या पुराने बकाया जैसी वजहें इसके पीछे हो सकती हैं. अगर आपको लगता है कि बिल सही नहीं है. तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं और उसे ठीक भी करवाया जा सकता है. जान लें तरीके.
गलत बिजली बिल क्यों आता हैं?
जब बिल जरूरत से ज्यादा आता है. तो सबसे पहले शक मीटर रीडिंग पर जाता है. कई बार मीटर रीडर गलत यूनिट नोट कर लेता है या अनुमान के आधार पर बिल बना दिया जाता है. मीटर खराब हो तो भी खपत ज्यादा दिख सकती है. पुराने बकाया का जुड़ जाना भी एक वजह बनता है. इसके अलावा स्लैब रेट गलत लगने से भी रकम बढ़ जाती है.
कई बार टेक्निकल फॉल्ट भी वजह बनता है. ऑनलाइन सिस्टम में डेटा अपडेट के दौरान गलती हो सकती है. इसलिए शिकायत करने से पहले अपने पिछले बिलों से तुलना करना और मीटर की मौजूदा रीडिंग देखना समझदारी होती है. जिससे आपको अंदाजा हो जाए कि गलती कहां है.
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बिजली बिल की शिकायत कैसे दर्ज करें?
अगर आपको लगता है कि बिल गलत आया है. तो सबसे पहले ऑनलाइन शिकायत करना सबसे आसान तरीका है. अपनी बिजली कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर जाकर कंप्लेंट सेक्शन में जाएं और कंज्यूमर नंबर डालकर शिकायत दर्ज करें. इसमें बिल नंबर, मीटर रीडिंग और समस्या का पूरा डिटेल देना जरूरी होता है.
अगर ऑनलाइन शिकायत नहीं हो पा रही है. तो आप सीधे नजदीकी बिजली कार्यालय में जाकर लिखित शिकायत दे सकते हैं. कई जगह टोल फ्री नंबर या व्हाट्सऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज की जाती है. शिकायत करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है. जिससे आप अपनी कंप्लेंट की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं.
मीटर हो जाता है चेंज
शिकायत दर्ज होने के बाद बिजली विभाग मामले की जांच शुरू करता है. इसमें मीटर और बिल दोनों की दोबारा जांच की जाती है. जरूरत पड़ने पर नई रीडिंग ली जाती है या मीटर को टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है. अगर गलती पाई जाती है. तो बिल को सही कर दिया जाता है. मीट खराब होता है तो उसे चेंज कर दिया जाता है.
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Source: IOCL




























