क्या साड़ी या धोती-कुर्ता पहनने पर एंट्री देने से मना कर सकते हैं रेस्टोरेंट या होटल, क्या है नियम?
Hotel Rules: दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में कपल को कपड़ों की वजह से रोका. क्या साड़ी या धोती-कुर्ता पहनने पर एंट्री देने से मना कर सकते हैं रेस्टोरेंट या होट? जानें नियम.

हाल ही में दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में एक दंपति को उनके कपड़ों की वजह से रेस्टोरेंट के अंदर नहीं जाने दिया गया. सलवार सूट और जींस शर्ट पहने हुए इस दंपति को होटल के मैनेजमेंट ने बाहर ही रोक दिया. सोशल मीडिया पर यह मामला काफी तूल पकड़ चुका है होटल ने अपने इस व्यवहार को लेकर माफी मांगी है.
तो वहीं विधायक कपिल मिश्रा ने इस मामले को लेकर जांच के निर्देश दे दिए हैं ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आ रहा है क्या धोती कुर्ता या साड़ी पहनने पर कोई रेस्टोरेंट या होटल एंट्री देने से मना कर सकता है. जान लीजिए ऐसे लेकर क्या है नियम.
क्या हैं होटल-रेस्टोरेंट में एंट्री के नियम?
दिल्ली के पीतमपुरा में दंपति को पहनावे के लेकर रेस्टोरेंट में एंट्री नहीं दी गई है. लेकिन आपको बता दें होटल और रेस्टोरेंट में एंट्री से जुड़े नियम साफ तौर पर भेदभाव को रोकते हैं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(2) कहता है कि किसी भी नागरिक को धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान या पहनावे के आधार पर सार्वजनिक जगहों पर प्रवेश से नहीं रोका जा सकता.
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रेस्टोरेंट, होटल, दुकान और सभी सार्वजनिक सुविधाओं में यह नियम लागू होता है. इसके अलावा The Sarai’s Act, 1867 के तहत होटल और सराय सभी मेहमानों को बिना भेदभाव ठहराने और सेवा देने के लिए बाध्य हैं. जबतक कि कोई वैध कारण ना हो जैसे सुरक्षा, स्वास्थ्य या आचार संहिता का उल्लंघन. तो ऐसे में एंट्री रोकी जा सकता है. लेकिन सिर्फ पहनावे के कारण एंट्री न देना कानूनी रूप से गलत है.
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कितनी हो सकती है सजा?
अगर कोई होटल या रेस्टोरेंट सिर्फ पहनावे, जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर एंट्री देने से मना करता है. जैसा पीतमपुरा वाले मामले में हुआ है. तो यह सीधे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(2) का उल्लंघन है. तो साथ ही The Sarai’s Act, 1867 के मुताबिक ऐसा करने पर उस रेस्टोरेंट और होटल के मालिक या मैनेजर पर कार्रवाई हो सकती है. दोषी पाए जाने पर एक महीने तक की कैद या फिर जुर्माना लगाया जा सकता है. आपको बता दें यह मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून और मानवाधिकार उल्लंघन के तहत भी लिया जा सकता है. जिसमें आर्थिक मुआवजा भी देना पड़ सकता है.
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