FD मैच्योर हुई, बैंक ने बताया ही नहीं, अब देने पड़ेंगे 15.35 लाख
हैदराबाद के जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को एक रिटायर्ड वैज्ञानिक को 15.35 लाख रुपये से अधिक देने का आदेश दिया है. बैंक ने FD की अवधि पूरी होने की जानकारी और उसे आगे बढ़ाने का विकल्प नहीं बताया था.

ज्यादातर लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए कई बार FD तो कराते हैं, लेकिन मैच्योरिटी के समय जरूरी जानकारी नहीं मिलने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा ही एक मामला हैदराबाद में सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड साइंटिस्ट की 15 लाख रुपए की जमा रकम को लेकर बैंक और ग्राहक के बीच विवाद हो गया. ऐसे में अगर आपने भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई है, तो समय रहते उसकी मैच्योरिटी डेट जरूर चेक कर लें.
मामले की सुनवाई करते हुए हैदराबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को 15.35 लाख रुपए से अधिक का पेमेंट करने का आदेश दिया. आयोग ने पाया कि बैंक ने ग्राहक को FD के मैच्योरिटी के बारे में जानकारी नहीं दी और न ही इसे आगे बढ़ाने के ऑप्शन के बारे में बताया.
क्या है पूरा मामला?
एक रिटायर्ड साइंटिस्ट ने 13 दिसंबर 2018 को अपनी रिटायरमेंट पेंशन से 15 लाख रुपए की FD कराई थी. जमा रकम यानी FD की मैच्योरिटी 12 दिसंबर 2023 को होनी थी. उन्होंने यह पैसा बुढ़ापे में अचानक आने वाले खर्चों के लिए बचाकर रखा था.
रिटायर्ड साइंटिस्ट का आरोप था कि बैंक ने उन्हें FD की अवधि पूरी होने की जानकारी नहीं दी. साथ ही, FD में जमा पैसा उनके बचत खाते में भी ट्रांसफर नहीं किया गया. उन्हें लगा कि बैंक ने उनकी FD को अपने आप आगे बढ़ा दिया होगा.
बैंक के पोर्टल पर दिखी जीरो ब्याज दर
परेशानी तब सामने आई, जब रिटायर्ड साइंटिस्टने बैंक के ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जमा रकम की जानकारी चेक की. पोर्टल पर FD की नई मैच्योरिटी तारीख दिसंबर 2028 दिखाई गई, लेकिन ब्याज दर 0% दर्ज थी. इसके बाद उन्होंने बैंक से संपर्क किया. बैंक ने कहा कि यह सरकारी योजना के तहत जमा की गई रकम है और FD की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद इस पर ब्याज नहीं मिल सकता है.
बैंक ने यह भी कहा कि जमा रकम को आगे बढ़ाने के लिए ग्राहक को मैच्योरिटी के एक साल के भीतर आवेदन करना चाहिए था. लेकिन साइंटिस्ट का आरोप था कि बैंक ने निवेश के समय उन्हें योजना के नियमों और मैच्योरिटी से जुड़ी जरूरी जानकारी नहीं दी. उन्हें SMS, ईमेल या किसी अन्य माध्यम से भी मैच्योरिटी की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
आयोग ने बैंक को क्यों ठहराया जिम्मेदार?
हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की दलीलों को खारिज कर दिया. आयोग के मुताबिक, बैंक को ग्राहक को FD की मैच्योरिटी के बारे में जानकारी देनी चाहिए थी. साथ ही, जमा रकम को आगे बढ़ाने के ऑप्शन के बारे में भी बताया जाना चाहिए था. इसलिए आयोग ने बैंक की इस लापरवाही को सेवा में कमी माना और ग्राहक को पेमेंट करने का आदेश दिया.
बैंक को कितना पैसा देना होगा?
आयोग के आदेश के मुताबिक, बैंक को ग्राहक को 15 लाख रुपए की मूल जमा रकम के साथ 12 दिसंबर 2023 तक सालाना 8.5% की दर से ब्याज देना होगा. इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए 25,000 रुपए और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए 10,000 रुपए भी देने होंगे. इस तरह, मैच्योरिटी के बाद के ब्याज को छोड़कर बैंक को कुल 15.35 लाख रुपए से ज्यादा का पेमेंट करना होगा.
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