Credit-Debit Card News: कार्ड सेव करते ही क्यों कट जाता है ₹1? जानिए बैंकों के इस 'सीक्रेट' वेरिफिकेशन का सच
Pre-Authorization Rule: अक्सर जब आप किसी ऐप या वेबसाइट पर नया डेबिट या क्रेडिट कार्ड जोड़ते है तो 1 रुपये आपके अकाउंट से कट जाते हैं. ऐसे में लोग घबरा जाते हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ ओर ही वजह है.

- ऐप/वेबसाइट पर कार्ड जोड़ने पर 1 रुपया कटता है।
- यह प्रक्रिया कार्ड की सक्रियता और वैधता की जांच करती है।
- इसे प्री-ऑथराइजेशन कहते हैं, असली चार्ज नहीं होता।
- यह पैसा कुछ मिनटों से कुछ दिनों में वापस मिल जाता है।
Pre-Authorization Rule: कई बार जब आप किसी ऐप या फिर वेबसाइट पर नया डेबिट या क्रेडिट कार्ड जोड़ते हैं तो अक्सर आपके अकाउंट से 1 रुपये कट जाते हैं, जिसे देखकर लोग घबरा जाते हैं और उनके मन में एक सवाल आता है कि कही कुछ गड़बड़ तो नहीं है? लेकिन सच में ऐसा नहीं है. इसका मकसद सिर्फ आपके कार्ड को वेरिफाई करना होता है. यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया होती है.
यह प्रोसेस कैसे काम करता है?
अगर बात करें इसके पीछे के कारण की तो जब आप अपने कार्ड की डिटेल डालते हैं तो पेमेंट सिस्टम बैंक से यह चेक करता है कि आपका कार्ड एक्टिव है भी या नहीं और साथ ही उससे ट्रांजैक्शन हो सकता है या नहीं. इसलिए ही 1 रुपये का ट्रांजैक्शन किया जाता है. वहीं अगर बैंक इसे मंजूर कर देता है तो कार्ड वैलिड माना जाता है. इस प्रोसेस के बाद आप आसानी से आगे पेमेंट कर सकते हैं.
क्या होता है प्री-ऑथराइजेशन?
टेक्निकल लैंग्वेज में इस प्रोसेस को प्री-ऑथराइजेशन ( Pre- Authorization) कहा जाता है.
- इसका साफ मतलब है कि यह असली चार्ज नहीं होता है.
- यह सिर्फ एक अस्थायी होल्ड होता है.
- इसका साफ तौर पर मकसद कार्ड की जांच करना होता है.
पैसे कब वापस आते हैं?
कई मामलो में यह 1 रुपये तो
- कुछ मिनटों में या फिर घंटों में वापस आ जाता है.
- साथ ही कभी-कभी बैंक प्रोसेस के चलते 1-2 दिन भी लग सकते हैं.
क्यों जरूरी है यह प्रोसेस?
- फर्जी या फिर गलत कार्ड डिटेल्स को रोकने के लिए.
- कार्ड की वैधता को जांचने के लिए.
- फ्यूचर के ट्रांजैक्शन को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए.
ध्यान रखने वाली बात
भारत में आमतौर पर 1 रुपये का ही टेस्ट ट्रांजैक्शन होता है, लेकिन कुछ प्लेटफॉर्म पर यह रकम थोड़ी ज्यादा भी हो सकती है. इसका मकसद हमेशा एक ही होता है और वह सिर्फ कार्ड को वेरिफाई करना न कि पैसे लेना.
Source: IOCL


























