Video: पुणे में स्कूली बच्चे पर एक साथ झपटे 5 आवारा कुत्ते, नीचे गिराकर किया हमला, सामने आया वीडियो
पुणे में एक बच्चा सुबह स्कूल जाते समय आवारा कुत्तों के झुंड का शिकार हो गया. कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया, लेकिन पास खड़े एक व्यक्ति ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे बचा लिया. घटना का वीडियो वायरल है.

Viral Video: सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के पुणे से एक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें एक मासूम बच्चा आवारा कुत्तों के झुंड का शिकार बन गया. बच्चा सुबह-सुबह स्कूल के लिए निकला था और अपने ही सोसाइटी के गेट तक सुरक्षित नहीं पहुंच पाया. वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही कुत्तों ने उस पर हमला किया, बच्चा जमीन पर गिर गया.
गनीमत यह रही कि पास में मौजूद एक शख़्स ने तुरंत हस्तक्षेप किया. वह दौड़ता हुआ आया, बच्चे का जूता उठाया और कुत्तों को मारकर भगा दिया. अगर समय रहते कोई वहां नहीं होता, तो इस मासूम की जान खतरे में पड़ सकती थी. यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि न तो बच्चों की सुरक्षा उनके सोसाइटी परिसर में है और न ही बाहर. न दिन में, न रात में बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं.
#Pune, #Maharashtra- yet another kid mauled by a pack of #straydogs without provocation!
— StrayDogFreeMumbai (@XStrayDogMumbai) February 20, 2026
He was simply off to school early morning. Couldn't even reach the exit gate of his society safely!
Kids arent safe in their own residential premises, arent safe out on the roads. Not safe… pic.twitter.com/KsS8JJqZjc
घटना के दौरान क्या हुआ?
वीडियो में दिखाया गया है कि कुत्तों ने बच्चे पर हमला किया, जिससे वह गिर गया. तभी पास खड़े एक शख़्स ने दौड़कर बच्चा का जूता उठाया और उसे कुत्तों से बचाने के लिए उनका पीछा किया. इस नन्हें बच्चे की जान समय रहते बचाई गई.
एक यूजर ने लिखा, "अगर दोनों माता-पिता को घर चलाने के लिए काम करना पड़े तो क्या होगा? मैंने जितने भी वीडियो देखे हैं, उनमें लगभग सभी बच्चों पर उनके घरों के बाहर, इस मामले में सोसाइटी परिसर के बाहर, हमला हुआ है. ऐसा नहीं है कि माता-पिता ने अपने छोटे बच्चों को अकेले राष्ट्रीय राजमार्ग पार करने के लिए छोड़ दिया हो."
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है. केवल अभिभावकों पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है. आवारा कुत्तों का नियंत्रण, रिहायशी परिसरों की निगरानी और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बेहद महत्वपूर्ण हैं. समय रहते हस्तक्षेप ही ऐसी घटनाओं से जीवन बचा सकता है.
Source: IOCL
























