ये है दुनिया की सबसे सख्त 'पत्थर जैसी' मछली, महीनों की मेहनत और बैक्टीरिया से होती है तैयार
'कात्सुओबुशी' का इतिहास काफी पुराना है. 8वीं सदी में भी 'उबाली और सुखाई गई सख्त मछली' का जिक्र मिलता है, जबकि इसे खमीर करने का चलन एडो काल (1603-1868) से शुरू हुआ.

जापान के पारंपरिक खान-पान की बात ही अलग है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वहां एक ऐसी भी मछली बनाई जाती है जो पत्थर से भी ज्यादा सख्त होती है? इसे 'कात्सुओबुशी' कहा जाता है. दिखने में यह भले ही लकड़ी के किसी बेजान टुकड़े जैसी लगे, लेकिन जब इसे तराशा जाता है तो यह किसी कीमती रत्न या रंगीन कांच की तरह चमकने लगती है. महीनों तक चलने वाली फर्मेंटेशन और सुखाने की एक बेहद जटिल प्रक्रिया से गुजरने के बाद तैयार होने वाली यह मछली, जापानी रसोई का सबसे खास हिस्सा है. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जो लोगों को हैरान कर रहा है.
8वीं सदी से जुड़ा है इतिहास, सूप और सॉस की है असली जान
'कात्सुओबुशी' का इतिहास काफी पुराना है. 8वीं सदी में भी 'उबाली और सुखाई गई सख्त मछली' का जिक्र मिलता है, जबकि इसे खमीर करने का चलन एडो काल (1603-1868) से शुरू हुआ. यह जापानी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले मशहूर 'दाशी' स्टॉक का मुख्य घटक है, जिसका उपयोग मीसो सूप और सोबा नूडल्स की डिपिंग सॉस जैसी लोकप्रिय डिशेज बनाने के लिए किया जाता है.
महीनों चलती है बनाने की प्रक्रिया, लकड़ी के धुएं में सुखाया जाता है. इस नायाब डिश को बनाने की शुरुआत 'स्किपजैक टूना'मछली से होती है.
पहला चरण: बर्फ में जमी मछली को 24 घंटे तक पानी में पिघलाया जाता है, फिर इसके टुकड़े करके 90 मिनट तक एक खास कड़ाहे में उबाला जाता है. इसके बाद इसकी हड्डियां, त्वचा और अतिरिक्त चर्बी हटा दी जाती है.
धुएं में पकाना: उबली हुई मछली के टुकड़ों को लकड़ी से धुआं देकर सुखाया जाता है. यह काम लगभग एक महीने तक दर्जनों बार दोहराया जाता है. इस धुएं से मछली में मौजूद पानी और चर्बी खत्म हो जाती है और यह खराब होने से बच जाती है.
खास बैक्टीरिया से बनती है 'रत्न' जैसी सख्त
कात्सुओबुशी की सबसे बेहतरीन क्वालिटी तैयार करने के लिए एक बेहद अनोखा तरीका अपनाया जाता है. मछली के टुकड़ों पर Aspergillus glaucus नाम का बैक्टीरिया स्प्रे किया जाता है और 20 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले कमरे में दो हफ्तों के लिए छोड़ दिया जाता है.
इसके बाद फंगस से ढके इन टुकड़ों को दो दिनों तक धूप में सुखाया जाता है. यह प्रक्रिया कई महीनों तक बार-बार दोहराई जाती है, जब तक कि मछली में नमी का स्तर घटकर केवल 18% से 20% न रह जाए.
फंगस का जादू: यह खास फफूंद मछली की नमी को सोख लेती है, इसके प्रोटीन को एमीनो एसिड में तोड़ देती है और इसे इतना सख्त बना देती है कि इसे आम चाकू से काटना मुमकिन नहीं होता. इसे लकड़ी छीलने वाले रंदे जैसे औजार से पतले-पतले फ्लेक्स में घिसकर इस्तेमाल किया जाता है.
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यूजर ने किए किए ऐसे ऐसे कमेंट्स
इस अजीबोगरीब और सख्त मछली का वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर लोगों का दिमाग घूम गया है. यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा... "भाई ये मछली है या इमारत बनाने वाला रोड़ा! इसे चबाने गए तो दांत ही हाथ में आ जाएंगे." दूसरे यूजर ने लिखा... "जापानी लोग भी कमाल करते हैं, खाने की चीज को इतना घिसकर और सुखाकर लकड़ी ही बना दिया." तीसरे यूजर ने लिखा... "इसे काटने के लिए किचन के चाकू की नहीं, कारपेंटर (बढ़ई) के औजारों की जरूरत पड़ेगी."
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