T-20 WC: अंडर आर्म से लेकर राउंड आर्म तक, जानिए कहां से आया फास्ट बॉलिंग का कल्चर, वायरल वीडियो ने खोले 200 साल पुराने राज
सोशल मीडिया पर क्रिकेट के इसी दिलचस्प इतिहास से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में बताया जा रहा है कि कैसे अंडरआर्म से शुरू हुई गेंदबाजी धीरे-धीरे राउंडआर्म और फिर ओवरआर्म में बदली.

क्रिकेट आज सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि एक जुनून है. दुनिया भर में करोड़ों लोग इसे देखते, खेलते और इसके हर छोटे-बड़े पहलू पर चर्चा करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज जिस क्रिकेट में गेंदबाज तेज रफ्तार से कंधे के ऊपर से गेंद फेंकते हैं, उसकी शुरुआत आखिर कैसे हुई थी. कभी क्रिकेट में गेंद फेंकने का तरीका बिल्कुल अलग था. गेंद जमीन के पास से लुढ़कती हुई आती थी और बल्लेबाज आराम से उसे खेल लेते थे. समय के साथ गेंदबाजों ने नए तरीके खोजे, विवाद हुए, अंपायरों ने नो-बॉल दी, खिलाड़ी मैदान छोड़कर चले गए और आखिरकार क्रिकेट ने वह रूप लिया जिसे हम आज जानते हैं.
इन दिनों सोशल मीडिया पर क्रिकेट के इसी दिलचस्प इतिहास से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में बताया जा रहा है कि कैसे अंडरआर्म से शुरू हुई गेंदबाजी धीरे-धीरे राउंडआर्म और फिर ओवरआर्म में बदली. यह कहानी इतनी रोचक है कि क्रिकेट फैंस इसे बार-बार देख रहे हैं और कमेंट में अपनी राय भी दे रहे हैं.
शुरुआत में अंडरआर्म स्टाइल से डाली जाती थी बॉल
क्रिकेट के शुरुआती दौर में गेंदबाजी का तरीका बिल्कुल अलग था. उस समय गेंदबाज अंडरआर्म यानी हाथ नीचे से गेंद फेंकते थे. क्रिकेट इतिहासकार जॉन नायरन ने 1780 के दशक के एक तेज गेंदबाज डेविड हैरिस का जिक्र किया है. हैरिस हैम्बलडन क्लब के लिए खेलते थे और उनकी अंडरआर्म गेंदें इतनी तेज होती थीं कि लोग हैरान रह जाते थे. नायरन ने लिखा था कि उन्हें समझ ही नहीं आता था कि नीचे से फेंकी गई गेंद इतनी तेज कैसे हो सकती है.
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फिर आया दिलचस्प मोड़ और बदल गया क्रिकेट
इसके बाद लगभग 1800 के आसपास क्रिकेट में राउंडआर्म गेंदबाजी की शुरुआत हुई. एक लोकप्रिय कहानी के अनुसार इसकी शुरुआत क्रिस्टिना विल्स नाम की महिला से जुड़ी बताई जाती है. कहा जाता है कि उनके भारी-भरकम स्कर्ट के कारण वह अंडरआर्म गेंद नहीं फेंक पाती थीं, इसलिए उन्होंने हाथ को थोड़ा ऊपर उठाकर गेंद फेंकी. हालांकि इतिहासकारों का मानना है कि यह कहानी पूरी तरह सच नहीं भी हो सकती.
1860 तक आम हो चुकी थी राउंड आर्म बॉलिंग
लेकिन एक घटना जरूर दर्ज है. क्रिस्टिना के भाई जॉन विल्स को 1822 में लॉर्ड्स के मैदान पर राउंडआर्म गेंदबाजी के लिए नो-बॉल दे दी गई थी. बताया जाता है कि वह इतने नाराज हुए कि तुरंत घोड़े पर सवार होकर मैदान छोड़कर चले गए और कसम खाई कि अब कभी क्रिकेट नहीं खेलेंगे. 1860 के दशक तक राउंडआर्म गेंदबाजी आम हो चुकी थी. लेकिन गेंदबाज लगातार कोशिश कर रहे थे कि हाथ को कंधे से ऊपर ले जाकर गेंद फेंकें. यही वह दौर था जब आधुनिक क्रिकेट की गेंदबाजी का रूप बनने लगा.
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फिर मिली कानूनी मान्यता
आखिरकार 1864 में ओवरआर्म गेंदबाजी को आधिकारिक रूप से कानूनी मान लिया गया. यही वजह है कि कई क्रिकेट इतिहासकार 1864 को आधुनिक क्रिकेट की शुरुआत मानते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में इस पूरे बदलाव को बेहद दिलचस्प तरीके से समझाया गया है. लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि उन्हें पहली बार पता चला कि क्रिकेट की गेंदबाजी के पीछे इतनी बड़ी कहानी छिपी है. कई यूजर्स ने लिखा कि अगर ओवरआर्म गेंदबाजी कानूनी नहीं होती तो शायद आज के तेज गेंदबाजों का जादू भी देखने को नहीं मिलता. वीडियो को waqardaily नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है
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Source: IOCL


























