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अब नहीं होगी आपकी हर ऑनलाइन एक्टिविटी की निगरानी? AI ने निकाला नया रास्ता, जानें पूरी जानकारी

Artificial Intelligence: अब किसी भी यूजर के बारे में जानने के लिए उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

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  • इससे व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहेगी, विज्ञापन मॉडल बदलेगा।

Artificial Intelligence: आज के समय में ज्यादातर काम अब ऑनलाइन हो चुके हैं. ऐसे में Online ads में भी काफी तेजी आई है. लोगों को अब ज्यादातर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह के ऐड्स दिखाए जाते हैं. बता दें कि पहले ऐसा होता था कि जो आप देखते हैं उसी के अनुसार आपको ऐड्स भी दिखाए जाते थे. इससे ज्यादातर कंपनियां लोगों की एक्टिविटी पर नजर रखती थीं. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसका एक समाधान निकाल लिया गया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

बिना प्रोफाइल बनाए होगा काम

रिसर्च के अनुसार, अब किसी भी यूजर के बारे में जानने के लिए उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी. अब इस काम को AI के जरिए किया जा सकेगा. दरअसल, एआई अब किसी भी यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक नहीं करेगा बल्कि एआई इस जगह पर यूजर उस समय जो भी वेब पेज पर काम कर रहा है उसी को समझकर यूजर को ऐड्स दिखाने का काम करेगा.

बता दें कि आप जिस भी वेब पेज पर हैं एआई उसे अच्छे से समझेगा कि उस समय आपके लिए कौन सा ऐड सबसे बेस्ट रहेगा. इस तरीके से लोगों की पर्सनल डिटेल्स सुरक्षित रहेंगी.

क्या बदल जाएगा ऑनलाइन ऐड्स का तरीका

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में पाया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बिना किसी यूजर की पर्सनल जानकारी को इकट्ठा किए भी उसके मन के अनुसार उसे ऐड्स दिखाए जा सकते हैं. इसका मतलब ये है कि आने वाले समय में अब ऑनलाइन विज्ञापन दिखाने के लिए अब लोगों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

इतने लोगों पर हुआ टेस्ट

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस तरीके को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने करीब 1000 लोगों का इसका टेस्ट किया है. इस टेस्ट को चार अलग-अलग स्टेजों पर किया गया. सभी प्रतिभागियों को ऐसी वेबसाइटें दिखाई गईं जिन पर AI द्वारा तैयार किए गए Contextual विज्ञापन मौजूद थे. इसके बाद उनसे उनके अनुभवों के बारे में सवाल पूछे गए.

पहले टेस्ट में लोगों को चलने-फिरने वाले यानी एनिमेटेड ऐड नॉर्मल ऐड्स के मुकाबले ज्यादा पसंद आए.

दूसरे टेस्ट में पता चला कि जो ऐड्स कंटेंट के बीच में दिखाए गए वो साइड में आने वाले ऐड्स के मुकाबले ज्यादा प्रभावी रहे.

वहीं, तीसरे और आखिरी टेस्ट में ये पता चला कि यूजर उस समय जो भी कंटेंट देख रहा है उसी से मिलता-जुलता ऐड दिया जाए तो लोग उसे ज्यादा गौर से देखते हैं.

क्या भविष्य में बदलेगा ऑनलाइन ऐड्स का मॉडल

इस टेस्ट के बाद से ही माना जा रहा है कि अगर ये टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो डिजिटल ऐड्स का पूरा तरीका बदला जा सकता है. इसके बाद से कंपनियों को किसी भी यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को लंबे समय तक ट्रैक करने की जरुरत नहीं होगी बल्कि उसी समय देखे जा रहे कंटेंट के आधार पर तुरंत ऐड्स दिखाए जा सकेंगे.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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