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नौकरी से पहले ही AI कर रहा है आपकी जासूसी? जानें क्या है Bossware

Bossware ऐसे सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स को कहा जाता है जिनकी मदद से कंपनियां अपने कर्मचारियों की एक्टिविटी पर नजर रख सकती हैं.

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  • कंपनी डिवाइस पर निजी जानकारी जोखिम में, सतर्क रहें।

What is Bossware: आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल सिर्फ चैटबॉट, फोटो एडिटिंग या कंटेंट बनाने तक ही सिमट के नहीं रह गया है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब ज्यादातर कंपनियां लोगों को हायर करने के लिए AI बेस्ड टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं. इतना ही नहीं, ये एआई टूल्स कंपनी में काम कर रहे लोगों की निगरानी भी करने लगी हैं. इसीलिए Bossware शब्द काफी तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है. आइए जानते हैं क्या होता है बॉसवेयर.

क्या है बॉसवेयर

जानकारी के अनुसार, Bossware ऐसे सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स को कहा जाता है जिनकी मदद से कंपनियां अपने कर्मचारियों की एक्टिविटी पर नजर रख सकती हैं. लेकिन सबसे बड़ी चिंता ये है कि कई मामलों में ये टूल्स नौकरी मिलने से पहले होने पर हायरिंग प्रोसेस से ही लोगों पर निगरानी रखने लगती हैं.

बता दें कि कई कंपनियां हायरिंग प्रोसेस को तेज और आसान बनाने के लिए AI बेस्ड सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं. ये सिस्टम एप्लीकेंट्स के रिज्यूमे, एक्सपीरिएंस, स्किल्स और उनके एचिवमेंट्स की जानकारियों को इकट्ठा कर सकते हैं.

ये बात यहीं तक नहीं रुकती है, दरअसल, कुछ AI टूल्स CV को भी स्कैन करती हैं और ये तय कर रही हैं कि कौन सा एप्लीकेंट दूसरे राउंड में जाएगा और कौन सा नहीं जाएगा. ऐसे में आपका रिज्यूमे सिर्फ HR ही नहीं बल्कि एक एल्गोरिदम भी पढ़ रहा होता है.

हालांकि, AI का इस्तेमाल हमेशा गलत नहीं होता है. इसका मकसद कई बार हायरिंग प्रोसेस में समय बचाना और सही उम्मीदवारों को जल्दी पहचानना होता है. लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब एप्लीकेंट्स को पता ही नहीं होता है कि उनकी जानकारी का किस तरह से इस्तेमाल हो रहा है.

नौकरी मिलने के बाद शुरू हो सकती है निगरानी

जानकारी के लिए बता दें कि Bossware का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कंपनी में काम कर रहे लोगों की एक्टिविटी को मॉनिटर करने के लिए किया जाता है. कंपनी जो सॉफ्टवेयर लोगों की निगरानी के लिए इस्तेमाल कर रही है उससे ये पता लगता है कि कर्मचारी कितने समय तक कंप्यूटर पर एक्टिव रहा, किन एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया या किस तरह की एक्टिविटी उसने ऑफिस में की हैं.


नौकरी से पहले ही AI कर रहा है आपकी जासूसी? जानें क्या है Bossware

कुछ सिस्टम स्क्रीन एक्टिविटी, लॉगिन टाइम, वेबसाइट विजिट और दूसरे डिजिटल एक्टिविटी को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं. बता दें कि इस टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड जॉब्स के बढ़ने के बाद से शुरू हुआ है.

हालांकि, हर Bossware टूल एक जैसा नहीं होता है. कंपनी कौन-सी जानकारी इकट्ठा कर रही है और उसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा है, ये उसके सॉफ्टवेयर और प्राइवेसी पॉलिसी पर निर्भर करता है.

क्या आपकी पर्सनल जानकारी भी खतरे में है?

इन एआई टूल्स के इस्तेमाल से सबसे बड़ा सवाल ये आता है कि इससे लोगों की पर्सनल जानकारी कितनी सुरक्षित है. अगर आप कंपनी के लैपटॉप, ईमेल अकाउंट, VPN या दूसरे ऑफिशियल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वहां आपकी एक्टिविटी की निगरानी की संभावना पर्सनल डिवाइस के मुकाबले में ज्यादा होती है.

इसलिए ऑफिस के डिवाइस को पर्सनल कामों के लिए इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है. बैंकिंग, पर्सनल ईमेल, सोशल मीडिया या संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स जैसे कामों के लिए जितना संभव हो तो अपना पर्सनल डिवाइस का ही इस्तेमाल करना चाहिए.

AI की नजर से खुद को कैसे रखें सुरक्षित

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि कंपनी के सिस्टम पर पूरी तरह से गायब होने संभव नहीं होता है. अगर कंपनी ने किसी डिवाइस पर मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया है तो उसे छिपाने या बायपास करने की कोशिश करना कंपनी के नियमों के खिलाफ भी हो सकता है और आपकी नौकरी भी जा सकती है. इसीलिए ऐसा करने से बचना चाहिए और इसके बजाय आप दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं.


नौकरी से पहले ही AI कर रहा है आपकी जासूसी? जानें क्या है Bossware

  • नौकरी शुरू करते समय ये समझें कि कंपनी कौन-सा डेटा इकट्ठा करती है और कितने समय तक रखती है.
  • कंपनी के लैपटॉप और अकाउंट पर पर्सनल काम करने से बचें.
  • नौकरी के लिए जरूरी जानकारी ही शेयर करें. ज्यादा पर्सनल जानकारी को CV में शामिल न करें.
  • किसी AI वेबसाइट या ऐप में कंपनी की जरूरी फाइल, पर्सनल डॉक्यूमेंट्स अपलोड न करें.

अगर आपको लगता है कि कंपनी जरूरत से ज्यादा निगरानी कर रही है तो HR की प्राइवेसी पॉलिसी या लोकल कानूनों के तहत अपने अधिकारों की जानकारी लें.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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