पासवर्ड की तरह बदल सकेंगे फिंगरप्रिंट? वैज्ञानिकों की नई खोज ने उड़ाए होश
How to Reset Fingerprint: बायोमेट्रिक डेटा किसी भी तरह से चोरी हो जाता है तो भी उसे इनएक्टिव करके फिर से आपके फिंगरप्रिंट का एक नया एडिशन तैयार किया जा सके.

- एडवांस तकनीक से सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड नया फिंगरप्रिंट तैयार होगा।
How to Reset Fingerprint: आज के इस डिजिटल समय में प्राइवेसी लोगों की जरूरत बन चुकी है. साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी काफी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में लोग अपने डिवाइस में पासवर्ड, फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन जैसे लॉक्स का इस्तेमाल करते हैं. बता दें कि बायोमेट्रिक का इस्तेमाल अब लगभग सभी जगह होना शुरु हो चुका है. लेकिन अगर आपका बायोमेट्रिक डेटा ही चोरी हो जाए तो क्या होगा. अब नॉर्मल पासवर्ड तो आप आसानी से रिसेट कर सकते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर फिंगरप्रिंट को भी पासवर्ड के जैसे ही अगर रिसेट कर सकें तो कैसे होगा. हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ही खोज की है जिसने सभी को हैरान कर दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
वैज्ञानिकों की नई खोज
जानकारी के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने रिवोकेबल या कैंसिलेबल बायोमेट्रिक्स का नया तरीका पेश किया है. इसका मकसद ये है कि अगर आपका बायोमेट्रिक डेटा किसी भी तरह से चोरी हो जाता है तो भी उसे इनएक्टिव करके फिर से आपके फिंगरप्रिंट का एक नया एडिशन तैयार किया जा सके. इसका मतलब ये है कि आने वाले समय में लोग अपना फिंगरप्रिंट भी नॉर्मल पासवर्ड की तरह ही रिसेट कर सकेंगे.
बायोमेट्रिक डेटा की सबसे बड़ी कमजोरी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपका पासवर्ड चोरी हो जाता है तो आप तुरंत ही अपना पासवर्ड बदल देते हैं. लेकिन सोचिए अगर आपकी आंखों और फिंगरप्रिंट का स्कैन ही चोरी हो जाए तो उसे कैसे बदलेंगे. इसीलिए बायोमेट्रिक की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि अगर किसी साइबर अपराधी के हाथ आपका फिंगरप्रिंट या आईरिस डेटा लग जाए तो आपको बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है. इसीलिए अगर आपका बायोमेट्रिक डेटा एक बार लीक हो जाता है तो यह आपके लिए पूरी जीवन तक एक जोखिम बना रहेगा.
कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?
जानकारी के मुताबिक, इस सिस्टम को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने कई एडवांस कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. इसके बाद असली काम शुरू होता है. दरअसल, फिंगरप्रिंट की खास चीजें जैसे उसका डिजाइन, साइज और प्वाइंट्स को पहचाना जाता है. अच्छे से पहचान करने क बाद पूरे फिंगरप्रिंट को एक नया रूप देकर आपके प्रिंट का एक नया एडिशन तैयार किया जाता है जो पुराने फिंगरप्रिंट से बिलकुल ही अलग होता है.
इसके प्रोसेस के बाद डेटा को ज्यादा सेफ करने के लिए उसे एन्क्रिप्ट और compress भी किया जाता है. इससे होता ये है कि हैकर फिर से किसी भी फिंगरप्रिंट को दोबारा से तैयार नहीं कर सकेगा.
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