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क्या है Loop Engineering, जानें यह कैसे बदल देगा AI इस्तेमाल करने का तरीका?

Loop Engineering: अब तक AI के साथ काम करने का सबसे आम तरीका था कि यूजर हर स्टेज में निर्देश देता रहे. अगर किसी काम में कई स्टेप्स हों तो हर बार नया प्रॉम्प्ट लिखना पड़ता था.

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  • यह सॉफ्टवेयर विकास सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्य स्वचालित करेगा।

Loop Engineering: आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के काम को काफी हद तक आसान बनाया है. आज ऑनलाइन दुनिया में कई सारे AI चाटबोट्स मौजूद हैं जिनकी मदद से लोग अपने कई सारे काम कर लेते हैं. इसी के बाद से ही Prompt Engineering भी काफी चर्चा में आया था. यह एक तकनीक है जिससे लोग एएआई से अपने मुताबिक जवाब पाने के लिए सवाल पूछते हैं. आसान भाषा में बताएं तो ये वह तरीका है जिससे आप एएआई से अपने मन मुताबिक जवाब प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन इसके के लिए आपको उससे सही सवाल पूछना जरूरी है.

इसी प्रोसेस को प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग कहा जाता था. लेकिन अब AI विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Loop Engineering का दौर देख जा सकता है. आइए जानते हैं क्या है ये तकनीक?

क्या है यह नई तकनीक?

जानकारी के मुताबिक, Loop Engineering एक ऐसे टेक्नीक है जहां पर AI इंसानों को बार-बार निर्देश देने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसमें AI अपने आप ही सभी कामों को कर लेगा. इसमें एक बार पूरा सिस्टम सेट करना होता है. इसके बाद AI खुद एजेंट्स को निर्देश देगा और जरूरत पड़ने पर सभी रिजल्ट्स की जांच भी खुद कर लेगा. इस सिस्टम के आने के बाद इंसानों को बार-बार ऑर्डर देने की की जरूरत खत्म हो जाएगी.

AI खुद लिख रहा है प्रॉम्प्ट

AI कंपनी Anthropic की Claude Code टीम के प्रमुख Boris Cherny ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में बताया कि वह अब खुद प्रॉम्प्ट नहीं लिखते. उनकी जगह एक AI-बेस्ड सिस्टम यह काम करता है.

उनके अनुसार, अब एक AI एजेंट Claude को निर्देश देता है और वही पूरे काम का समन्वय करता है. इसका मतलब है कि इंसान सीधे AI मॉडल से बात करने के बजाय उस सिस्टम से बात करता है जो AI को कंट्रोल कर रहा होता है.

Loop Engineering किन चीजों पर बेस्ड है?

ऑटोमेशन (Automation)

सिस्टम किसी काम को केवल एक बार नहीं बल्कि लगातार चलाने में सक्षम होता है. इससे AI बिना रुके काम कर सकता है.

मल्टीपल एजेंट्स (Multiple Agents)

एक ही समय में कई AI एजेंट्स अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं. इससे काम तेजी से पूरा होता है और एजेंट एक-दूसरे के काम में रुकावट नहीं डालते.

स्किल्स और नॉलेज

AI को स्पेशल प्रॉम्प्ट, प्रोजेक्ट की जानकारी और काम से संबंधित रूल दिए जाते हैं ताकि वह बेहतर डिसीजन ले सके.

प्लग-इन्स और कनेक्टर्स

इनकी मदद से AI बाहरी टूल्स, डेटाबेस और अन्य सर्विसेज तक पहुंच प्राप्त कर सकता है.

सब-एजेंट्स

कई बार एक एजेंट को काम करने और दूसरे को उसकी समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी जाती है. इससे गलतियों की संभावना कम हो जाती है.

मेमोरी सिस्टम

AI मॉडल आमतौर पर अलग-अलग सत्रों की जानकारी याद नहीं रखते. इसलिए डेवलपर्स प्रोजेक्ट हिस्ट्री, अधूरे कार्य और जरूरी डेटा को बाहरी फाइलों या प्रोडक्टिविटी प्लेटफॉर्म्स में सुरक्षित रखते हैं.

यह भी पढ़ें: IPS मॉनिटर खरीदने से पहले जान लें! आखिर कितने साल तक चलता है इसका डिस्प्ले? क्या है टेक्नोलॉजी

स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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