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फोन की चार्जिंग हमेशा Watts में ही क्यों मापी जाती है? जानिए पूरी सच्चाई

Tech Tips: सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि Watt बिजली की Power यानी ताकत को मापने की यूनिट है.

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  • चार्जिंग स्पीड बैटरी स्थिति और तापमान से प्रभावित होती है।

Tech Tips: डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन लोगों के काम को आसान बनाने वाला डिवाइस बन चुका है. अब लोग स्मार्टफोन खरीदते समय कैमरा, प्रोसेसर और डिस्प्ले के साथ ही चार्जिंग स्पीड पर भी नजर रखते हैं. लोगों को अब फास्ट चार्जिंग वाले स्मार्टफोन पसंद आते हैं. इसके अलावा अक्सर आपने फोन के बॉक्स में 25W, 33W, 67W, 80W या 120W फास्ट चार्जिंग जैसे दावे देखे होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चार्जिंग की स्पीड को Watts (W) में ही क्यों बताया जाता है? आइए जानते हैं पूरी सच्चाई.

क्या होता है Watt

जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि Watt बिजली की Power यानी ताकत को मापने की यूनिट है. आसान भाषा में कहें तो ये बताता है कि कोई डिवाइस एक तय समय में कितनी इलेक्ट्रिकल पावर ले रहा है.

चार्जिंग के मामले में इसका मतलब है कि चार्जर फोन की बैटरी तक कितनी पावर पहुंचा सकता है. नॉर्मली इलेक्ट्रिकल पावर का संबंध Voltage और Current से होता है.


फोन की चार्जिंग हमेशा Watts में ही क्यों मापी जाती है? जानिए पूरी सच्चाई

इसका सरल फॉर्मूला है.

Power (Watt) = Voltage (Volt) × Current (Ampere)

यानी अगर किसी चार्जर का आउटपुट 10V और 6.7A है तो उसकी पावर करीब 67W होगी.

25W, 67W और 120W में क्या होता है अंतर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अक्सर लोग 25W, 67W और 120W चार्जिंग में अंतर नहीं समझ पाते हैं. दरअसल, इसका साफ मतलब है कि ज्यादा Watt का मतलब चार्जर ज्यादा पावर देने में सक्षम है. हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि 120W चार्जर हर फोन को 120W पर ही चार्ज करेगा. फोन और चार्जर के बीच कम्युनिकेशन होता है और फोन अपनी ताकत के हिसाब से पावर लेता है.

अगर आपका फोन मैक्सिमम 25W चार्जिंग सपोर्ट करता है तो 120W चार्जर लगाने पर भी फोन अपनी सपोर्टेड सीमा के आसपास ही पावर लेगा.

ज्यादा Watt का मतलब हमेशा डबल फास्ट चार्जिंग नहीं

आपको बता दें कि 120W चार्जिंग का मतलब ये नहीं है कि फोन 60W के मुकाबले में हर स्थिति में दोगुनी तेजी से चार्ज होगा. चार्जिंग स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है. शुरुआत में बैटरी कम होने पर फोन ज्यादा पावर ले सकता है लेकिन जैसे-जैसे बैटरी का प्रतिशत बढ़ता है, फोन सेफ्टी और बैटरी की लाइफ को ध्यान में रखते हुए पावर कम कर सकता है.

इसी वजह से किसी फोन की पूरी चार्जिंग का औसत पावर लेवल उसके ऐड में बताए गए मैक्सिमम Watt से काफी कम हो सकता है.

Voltage और Ampere का भी है बड़ा रोल

चार्जिंग को सिर्फ Watt देखकर समझना गलत होता है. दरअसल, Voltage और Ampere भी उतने ही जरूरी होते हैं. मान लीजिए एक चार्जर 10V पर 6.7A देता है. दोनों को मल्टिप्लाई करने पर करीब 67W Power मिलती है. इसी तरह अलग-अलग Voltage और Current के मिक्सचर से 25W, 67W या 120W जैसी पावर हासिल की जा सकती है.

यही वजह है कि अलग-अलग कंपनियां अपनी फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी में अलग-अलग Voltage और Current प्रोफाइल इस्तेमाल करती हैं.

फोन खुद तय करता है कितनी पावर लेनी है

जानकारी के लिए बता दें कि फास्ट चार्जिंग के दौरान चार्जर और स्मार्टफोन के बीच लगातार पावर मैनेजमेंट होता है. फोन का चार्जिंग कंट्रोलर बैटरी की कंडिशन, टेंपरेचर और दूसरे सेफ्टी नियमों के आधार पर तय करता है कि उस समय कितनी पावर लेना उचित है.

अगर फोन गर्म हो रहा है या बैटरी लगभग पूरी हो चुकी है तो चार्जिंग पावर कम की जा सकती है. इससे बैटरी पर बेमतलब का प्रेशर और ज्यादा गर्मी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.


फोन की चार्जिंग हमेशा Watts में ही क्यों मापी जाती है? जानिए पूरी सच्चाई

120W चार्जिंग में गर्मी क्यों बढ़ती है

जितनी ज्यादा पावर बैटरी तक पहुंचाई जाती है चार्जिंग सिस्टम में Heat Management उतना ही जरूरी हो जाता है. ज्यादा पावर के साथ गर्मी पैदा होने की संभावना भी बढ़ती है.

इसी कारण हाई-वॉट चार्जिंग वाले स्मार्टफोन में बेहतर चार्जिंग सर्किट, टेंपरेचर सेंसर, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और कई बार स्पेशल बैटरी डिजाइन का इस्तेमाल किया जाता है. कंपनियां चार्जिंग के दौरान टेंपरेचर को कंट्रोल रखने के लिए पावर को जरूरत के अनुसार घटाती-बढ़ाती भी हैं.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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