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QWERTY कीबोर्ड में इधर-उधर क्यों होते हैं अक्षर? 99% लोगों को नहीं पता इसका राज

QWERTY Keyboard: आज हम जिस कीबोर्ड पर टाइप करते हैं चाहे वो कंप्यूटर का हो या मोबाइल का, ज़्यादातर जगह QWERTY कीबोर्ड ही देखने को मिलता है.

QWERTY Keyboard: आज हम जिस कीबोर्ड पर टाइप करते हैं चाहे वो कंप्यूटर का हो या मोबाइल का, ज़्यादातर जगह QWERTY कीबोर्ड ही देखने को मिलता है. आपने भी गौर किया होगा कि इसमें अक्षर सीधे क्रम (A, B, C…) में नहीं बल्कि इधर-उधर बिखरे हुए लगते हैं. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया? चलिए जानते हैं इस रोचक कहानी के पीछे का असली कारण.

QWERTY की शुरुआत कैसे हुई?

QWERTY कीबोर्ड का इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा है. उस समय टाइपराइटर मशीन का इस्तेमाल शुरू हुआ था. साल 1870 के आसपास अमेरिकी आविष्कारक क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने पहला टाइपराइटर डिजाइन किया. शुरुआत में अक्षरों को सीधा A से Z तक क्रम में ही लगाया गया था लेकिन इससे एक बड़ी दिक्कत सामने आई.

टाइपराइटर की तकनीकी समस्या

जब लोग तेज़ी से टाइप करने लगे, तो उन दिनों की टाइपराइटर मशीन के धातु वाले हथौड़े (टाइप बार) बार-बार आपस में टकराकर फंस जाते थे. खासकर उन अक्षरों के साथ ऐसा ज्यादा होता था जिन्हें बार-बार एक साथ टाइप किया जाता था. इससे न केवल टाइपिंग धीमी हो जाती थी, बल्कि मशीन को ठीक करने में भी वक्त लगता था.

QWERTY डिज़ाइन का समाधान

इस समस्या का हल निकालने के लिए शोल्स ने कीबोर्ड पर अक्षरों को जानबूझकर बेतरतीब ढंग से लगाया. उनका मकसद था कि जो अक्षर ज़्यादा साथ-साथ टाइप होते हैं, उन्हें दूर-दूर रखा जाए ताकि टाइप बार टकराएं नहीं. इसी सोच के आधार पर बनाया गया QWERTY लेआउट, जिसमें ऊपर की पंक्ति के शुरुआती छह अक्षर Q, W, E, R, T, Y हैं.

क्यों हुआ इतना लोकप्रिय?

QWERTY लेआउट ने टाइपराइटर की सबसे बड़ी समस्या हल कर दी. टाइप बार कम फंसने लगे और मशीन आसानी से चलने लगी. धीरे-धीरे यह लेआउट पूरी दुनिया में मानक बन गया. 20वीं सदी में जब कंप्यूटर और बाद में मोबाइल फोन आए तो पुराने टाइपिंग के आदी लोग आसानी से उन्हें इस्तेमाल कर सकें, इसलिए QWERTY लेआउट वहीं का वहीं रखा गया.

क्या और भी लेआउट मौजूद हैं?

जी हां, QWERTY के अलावा DVORAK और AZERTY जैसे कीबोर्ड लेआउट भी बनाए गए. Dvorak लेआउट टाइपिंग को और तेज़ और आसान बनाने के लिए विकसित किया गया था लेकिन QWERTY की लोकप्रियता इतनी ज्यादा हो चुकी थी कि लोग नया लेआउट अपनाने में रुचि नहीं दिखा पाए.

यानी QWERTY कीबोर्ड पर अक्षरों का इधर-उधर होना कोई गलती नहीं बल्कि तकनीकी मजबूरी थी. उस दौर की टाइपराइटर मशीनों की खामियों को दूर करने के लिए अक्षरों को इस तरह सजाया गया. आज भले ही आधुनिक कंप्यूटर और मोबाइल में ऐसी दिक्कत न हो लेकिन QWERTY लेआउट हमारी आदतों और सिस्टम का हिस्सा बन चुका है.

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