सस्ते में मिल रहा सेकेंड हैंड iPhone खरीदना चाहिए या नहीं? जान लें
अगर आप सेकेंड हैंड iPhone खरीदने की सोच रहे हैं तो थोड़ा रुक जाइए. आखिर क्यों सेकंड हैंड iPhone खरीदना भारी पड़ सकता है. खरीदने जा रहे हैं तो पहले पढ़ लें यह खबर.

- नए iPhone से पुराने मॉडल महंगे हुए, सस्ते फोन लुभा रहे।
- सस्ते फ़ोन में अक्सर बैटरी, इंटरनल पार्ट खराब हो सकते हैं।
- कई डिवाइस चोरी के, EMI ब्लॉक या Apple ID लॉक होते।
- बिल, IMEI, ID जांचें और टेक्नीशियन से जरूर दिखाएं।
जब भी कोई नया iPhone लॉन्च होता है. तो लोगों के मन में यही उम्मीद होती है कि अब पुराने मॉडल्स के दाम कम हो जाएंगे. लेकिन हाल ही में iPhone 18 Pro के आने के बाद मार्केट में बिल्कुल उलटी सिचुएशन देखने को मिली है. मांग बढ़ने की वजह से पुराने iPhone मॉडल सस्ते होने के बजाय और महंगे हो गए हैं. ऐसे में कई लोग अपने पुराने iPhone बेचकर नए वाले मॉडल्स खरीद रहे हैं.
इस बीच सोशल मीडिया पर लोग अपने पुराने iPhone बहुत ही सस्ते दामों में बेचने के ऑफर दे रहे हैं. जिन्हें देखकर कई खरीदारों के मन में लालच आ जाता है कि कम कीमत में iPhone मिल रहा है तो क्यों न खरीद लिया जाए. लेकिन क्या इतने सस्ते दाम में मिलने वाले सेकेंड हैंड iPhone को खरीदना वाकई फायदे का सौदा है या फिर नहीं, जान लीजिए पूरी खबर.
पुराने iPhone सस्ते क्यों मिलते हैं?
जब बाजार में कोई पुराना iPhone बहुत ही कम कीमत में मिल रहा होता है. तो उसके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होती है. कई बार लोग मजबूरी में या फिर पैसों की जरूरत के चलते अपना फोन बेचते हैं. लेकिन ज्यादातर मामलों में सस्ते मिलने वाले iPhone में कुछ कमी जरूर होती है. या फोन की बैटरी में खराबी, या उसके इंटरनल पार्ट में कोई गड़बड़ी होती है वहीं कुछ मामलों में फोन वाटर डैमेज यानी पानी में गिरे हुए होते हैं. जिन्हें रिपेयर कराकर मार्केट में बेच दिया जाता है.
इसके अलावा कुछ डिवाइस चोरी के या EMI पर लिए गए ऐसे फोन होते हैं जिनकी किस्तें न चुकाने पर फाइनेंस कंपनियों द्वारा ब्लॉक कर दिया जाता है. ऐसे फोन्स को खरीदने के बाद कुछ ही दिनों में Apple ID लॉक जैसी दिक्कत सामने आने लगती हैं. इसलिए सिर्फ कम कीमत देखकर खरीद लेना आपको नुकसान भी करा सकता है.

इन चीजों में हो सकती है कमी
सेकेंड हैंड iPhone खरीदते वक्त सबसे बड़ा खतरा उसकी बैटरी और इंटरनल पार्ट्स के साथ होता है. Apple के फोन्स में यह सुरक्षा कवच होता है कि अगर ऑरिजिनल स्क्रीन या बैटरी की जगह कोई लोकल पार्ट लगा दिया जाता है तो फोन की सेटिंग्स में अननोन पार्ट का मैसेज आने लगता है. बहुत से लोग रिफर्बिशड पार्ट्स डालकर फोन को एकदम नया जैसा चमका देते हैं और ग्राहकों को बेवकूफ बनाते हैं.
इसके अलावा iPhone की बैटरी हेल्थ अगर 80 परसेंट से नीचे जा चुकी है. तो फोन बहुत जल्दी डिस्चार्ज होने लगता है और बैटरी बदलवाने में हजारों रुपये का खर्च आ जाता है. ऐसे में जो फोन आपको 10-15 हजार रुपये सस्ता मिल रहा था. उसकी रिपेयरिंग का खर्चा जोड़कर वह नए फोन के बराबर ही महंगा पड़ जाता है. फोन खरीदने से पहले किसी ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर नहीं तो फिर किसी अच्छे टेक्निशनयन से उसे चेक करवा लेना सही रहता है.

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फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी बातें
बिना पक्के बिल और बॉक्स के सेकेंड हैंड iPhone कभी नहीं खरीदना चाहिए. कई बार लोग शौक-शौक में बिना ओरिजिनल इनवॉइस के सस्ता iPhone खरीद लेते हैं. लेकिन बाद में फोन लॉक होने पर दिक्कत में फंस जाते हैं. अगर आप किसी से पुराना iPhone खरीद भी रहे हैं. तो सबसे पहले उसका बॉक्स, ओरिजिनल बिल और IMEI नंबर चेक कर लें.
यह भी देख लें कि बेचने वाले ने अपनी Apple ID और Find My iPhone का फीचर पूरी तरह से लॉग आउट कर दिया हो वरना फोन रीसेट करते समय वह एक्टिवेशन लॉक के चक्कर में हमेशा के लिए बंद हो सकता है. हमेशा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से या फिर अपने किसी जानकार से ही सेकेंड हैंड फोन लें जिससे किसी भी तकनीकी खराबी के वक्त आपके पास सवाल पूछने का मौका हो.
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