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गजब की टेक्नोलॉजी! वैज्ञानिकों ने पानी जैसी चीज से बना दिया कंप्यूटर

Liquid Computer: इस अनोखे सिस्टम में वैज्ञानिकों ने एक स्पेशल लिक्विड के अंदर सैकड़ों बेहद छोटे पार्टिकल्स को रखा. ये पार्टिकल्स लगातार एक निश्चित तरीके से आगे-पीछे स्पीड करते रहते हैं.

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  • यह भविष्य में कंप्यूटिंग को बदल, डेटा प्रोसेसिंग सुधारेगा।

Liquid Computer: कंप्यूटर का इस्तेमाल कई सालों से चलता आ रहा है. पूरी दुनिया में कंप्यूटर को कई जगहों पर इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि पानी से भी कंप्यूटर चलता है. जी हां, दरअसल, जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई टेक्नोलॉजी तैयार की है जो कंप्यूटिंग की परिभाषा ही बदल सकती है. उन्होंने एक ऐसा लिक्विड कंप्यूटर तैयार किया है जिसमें किसी सिलिकॉन चिप या ट्रांजिस्टर की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी जगह लिक्विड में मौजूद सैकड़ों Microscopic Particles मिलकर काम करते हैं.

कैसे काम करता है ये लिक्विड कंप्यूटर?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनोखे सिस्टम में वैज्ञानिकों ने एक स्पेशल लिक्विड के अंदर सैकड़ों बेहद छोटे पार्टिकल्स को रखा. ये पार्टिकल्स लगातार एक निश्चित तरीके से आगे-पीछे स्पीड करते रहते हैं. जब इस सिस्टम में कोई जानकारी (Input) दी जाती है तो ये कण एक-दूसरे के साथ लिक्विड के जरिए से एक्शन करने लगते हैं.


गजब की टेक्नोलॉजी! वैज्ञानिकों ने पानी जैसी चीज से बना दिया कंप्यूटर

कणों की हलचल से लिक्विड में बेहद छोटे-छोटे Currents बनते हैं जो आसपास मौजूद दूसरे पार्टिकल्स की स्पीड को प्रभावित करते हैं. इस तरह सभी कण मिलकर एक मुश्किल पैटर्न तैयार करते हैं और वही पैटर्न मैसेज को प्रोसेस करने का काम करते हैं.

यानी यहां हर स्टेप को अलग-अलग प्रोग्राम करने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि कणों का नैचुरल नेचर ही काम करने में मदद करता है.

क्या है Reservoir Computing?

ये टेक्नोलॉजी किसी मुश्किल फिजिकल सिस्टम को इनपुट दिया जाता है और वह अपनी नैचुरल प्रोसेस के जरिए अलग-अलग पैटर्न तैयार करता है. इसके बाद वैज्ञानिक उन पैटर्न का विश्लेषण करके जरूरी रिजल्ट प्राप्त करते हैं. खास बात ये है कि सिस्टम के अंदर हर प्रोसेस को पूरी तरह समझना जरूरी नहीं होता. अगर सिस्टम लगातार एक जैसा रिएक्शन देता है तो उससे भरोसेमंद रिजल्ट हासिल किए जा सकते हैं.

वैज्ञानिकों का दावा है कि लिक्विड में मौजूद इतने बड़े ग्रुप के छोटे कणों के साथ रिजर्वॉयर कंप्यूटिंग का ये पहला सफल परफॉर्मेंस है.

पुराने कंप्यूटर से क्यों है अलग?

आपको बता दें कि आज के कंप्यूटरों में अरबों ट्रांजिस्टर ऑन और ऑफ होकर हर सेकंड करोड़ों काम करते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े लैंग्वेज मॉडल भी ऐसे ही बड़े हार्डवेयर और ज्यादा बिजली की खपत पर निर्भर होते हैं.


गजब की टेक्नोलॉजी! वैज्ञानिकों ने पानी जैसी चीज से बना दिया कंप्यूटर

वहीं, दूसरी तरफ, नया लिक्विड कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की जगह पर Physical Processes का इस्तेमाल करता है. इससे आगे आने वाले साल में ऐसे कंप्यूटर तैयार किए जा सकते हैं जो कम बिजली में मुश्किल कामों का समाधान कर सकें.

मुश्किल टेस्ट में भी किया शानदार प्रदर्शन

दरअसल, नई टेक्नोलॉजी की ताकत को चेक करने के लिए वैज्ञानिकों ने इसे कई मुश्किल टास्क दिए. इनमें सबसे चुनौतीपूर्ण काम था ऐसे डेटा का अंदाजा लगाना जिसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं. जैसे मौसम के बारे में जानकारी देना. इसके बावजूद लिक्विड कंप्यूटर ने ऐसे डेटा का काफी सही तरीके से अनुमान लगाया है. इतना ही नहीं, इस सिस्टम ने ऐसे संकेतों की भी पहचान की जो ज्यादा शोर वाले डेटा में लगभग छिपे हुए थे. ये ताकत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

भविष्य में बदल सकती है कंप्यूटिंग की तस्वीर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल ये टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती चरण में है और लैब तक ही सीमित है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि कंप्यूटिंग केवल इलेक्ट्रॉनिक चिप्स पर निर्भर नहीं रहेगी. नैचुरल फिजिकल प्रोसेस भी मैसेज को प्रोसेस करने में सक्षम हो सकती हैं.

आने वाले सालों में इसी के आधार पर ऐसे लो-पावर कंप्यूटर तैयार किए जा सकते हैं जो डेटा को वहीं प्रोसेस करें जहां वह इकट्ठा होता है. इससे बड़े डेटा सेंटरों पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी.

यह भी पढ़ें: Generative AI India: एआई से काम कितना आसान हुआ, कितनी नौकरियों पर खतरा?

स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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