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On-Grid vs Off-Grid vs Hybrid Solar Systems: घर के लिए कौन-सा सिस्टम परफेक्ट? यहां जानें हिसाब

On-Grid vs Off-Grid vs Hybrid Solar Systems: घर पर लगाने के लिए तीनों प्रकार के ही सोलर एनर्जी सिस्टम अच्छे ऑप्शन हैं, लेकिन जरूरत के हिसाब से इनका चयन कई चीजों पर निर्भर करता है.

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  • हाइब्रिड सिस्टम ग्रिड और बैटरी का मिश्रण, बिजली कटौती वाले क्षेत्रों को उपयुक्त है।

On-Grid vs Off-Grid vs Hybrid Solar Systems: अगर आप सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो इसके अलग-अलग टाइप की जानकारी होना जरूरी है. भारत में आमतौर पर ऑन-ग्रिड, ऑफ-ग्रिड और हाईब्रिड सोलर सिस्टम यूज होते हैं. तीनों के फायदे और नुकसान हैं. ऐसे में अपनी जरूरत के हिसाब से सही सिस्टम चुनना बहुत जरूरी हो जाता है. आज हम आपको इन तीनों के बारे में जरूरी जानकारी बताने जा रहे हैं, जिससे आपके लिए सही ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा.

पहले जानें तीनों का मतलब

ऑन-ग्रिड सिस्टम- जैसा नाम से जाहिर है, यह सिस्टम ग्रिड से कनेक्ट होता है. इसमें एनर्जी स्टोर करने के लिए बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती. इससे बनी सारी बिजली ग्रिड में सप्लाई होती है. यह सबसे किफायती और उन इलाकों के लिए बेस्ट ऑप्शन है, जहां ज्यादा पावर सप्लाई स्टेबल है और ज्यादा कट नहीं लगते. इस पर सरकारी सब्सिडी भी मिल जाती है.

ऑफ-ग्रिड सिस्टम- इसका ग्रिड से कोई संबंध नहीं होता. ऑफ-ग्रिड सिस्टम में पैनल बिजली बनाने के बाद उसे बैटरी में स्टोर कर लेते हैं, जिससे रात के समय यूज किया जा सकता है. यह एनर्जी नीड्स के मामले में आपको बिल्कुल इंडिपेंडेट बना सकता है. इसमें बिजली स्टोर करने के लिए बैटरी की जरूरत पड़ती है और इस कारण लागत बढ़ जाती है. इस पर सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती.

हाइब्रिड सिस्टम- यह ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड का मिश्रण है. यानी यह सिस्टम ग्रिड से भी कनेक्ट होगा और बाद में यूज करने के लिए एनर्जी को बैटरी में भी स्टोर करता है. अगर कहीं बिजली कंपनियां हाइब्रिड सिस्टम पर नेट मीटरिंग की परमिशन देती है तो इस सिस्टम पर सब्सिडी मिल सकती है. इसकी लागत ऑन-ग्रिड सिस्टम से ज्यादा, लेकिन ऑफ-ग्रिड सिस्टम से कम होती है. 

आपके लिए कौन-सा ऑप्शन है बेस्ट?

कब लगवाना चाहिए ऑन-ग्रिड सिस्टम?

अगर आप शहरी या ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से चलती रहती है तो यह बेस्ट ऑप्शन है. यह पावर प्रोड्यूस कर ग्रिड में सप्लाई करता रहेगा और बदले में आपको उसी हिसाब से फ्री बिजली मिल जाएगी. इसके अलावा इसकी कम कीमत भी इसे आकर्षक ऑप्शन बनाती है.

किसे लगवाना चाहिए ऑफ-ग्रिड सिस्टम?

अगर आप ऐसी जगह रहते हैं, जहां दिन में कुछ ही घंटे बिजली आती है तो ऑफ-ग्रिड सिस्टम बेहतर ऑप्शन रहेगा. भले ही इसकी अपफ्रंट लागत ज्यादा है, लेकिन यह बिजली के मामले में ग्रिड पर आपकी निर्भरता को खत्म कर देगा. 

कब लगवाना चाहिए हाइब्रिड सिस्टम?

हाइब्रिड सिस्टम उन इलाकों में लगाना बेहतर ऑप्शन होता है, जहां पावर सप्लाई तो है, लेकिन दिन में कई घंटों के पावर कट लगते हैं. यह बैटरी को चार्ज कर एनर्जी स्टोर कर लेता है, जो पावर कट के टाइम काम आ जाती है. वहीं एक्स्ट्रा एनर्जी को यह ग्रिड में सप्लाई कर आपका बिजली बिल भी कम कर देगा.

ये भी पढ़ें- भारत को नहीं मिलेगा Mythos का एक्सेस, ट्रंप सरकार के नए आदेश में भी राहत नहीं

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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