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स्मार्टफोन में होने जा रहा है बदलाव, साइज होगा बड़ा, यूजर खुद बदल सकेंगे बैटरी

New Smartphone Rules: जल्द ही कंपनियों को अपने फोन में ज्यादा कैपेसिटी वाली और रिप्लेसेबल बैटरी देनी होगी. यूरोपीय यूनियन में इसे लेकर 2027 में नए नियम लागू हो जाएंगे.

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  • यूरोपीय संघ 2027 से लागू करेगा नए स्मार्टफोन नियम।
  • कंपनियों को बनानी होंगी आसानी से बदलने वाली बैटरी।
  • 10 साल तक मिलेंगे फोन के स्पेयर पार्ट्स।
  • नए नियम से इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होने की उम्मीद।

New Smartphone Rules: जल्द ही आपको बैटरी डेड हो जाने के कारण नया फोन खरीदने के झंझट से छुटकारा मिल सकता है. दरअसल, कई यूजर्स की शिकायत रहती है कि उनका फोन नया होता है, लेकिन बैटरी खराब होने के कारण उन्हें फिर से नए फोन पर पैसा खर्च करना पड़ता है. अब यह स्थिति बदलने वाली है. यूरोपीय संघ नए नियम लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत कंपनियों को ऐसे फोन बनाने होंगे, जो ज्यादा समय तक चल सके और जिन्हें रिपेयर करना भी आसान है. एक बड़ा बदलाव बैटरी को लेकर भी हो सकता है. आइए जानते हैं कि नए नियम ग्राहकों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकते हैं. 

2027 से लागू हो जाएंगे नए नियम

पिछले कुछ सालों से कंपनियों ने अपने फोन में रिप्लेसेबल बैटरी देना बंद कर दिया है. यानी अगर यूजर चाहे तो वह आसानी से बैटरी नहीं बदल सकता. 2027 से नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को ऐसे फोन डिजाइन करने होंगे, जिनकी बैटरी यूजर खुद आसानी से बदल सके. इसके अलावा फोन में ऐसी बैटरी देनी होगी, जो ज्यादा चल सके और ज्यादा चार्ज साइकिल को हैंडल कर पाए. इससे फोन का साइज भी बड़ा हो सकता है. कंपनियों पर यह भी बाध्यता होगी कि उन्हें किसी मॉडल के लॉन्च होने के 10 साल बाद तक उनके स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध करवाने होंगे और वो रिपेयरिंग के नाम पर ग्राहकों से मनमर्जी के पैसे नहीं ले सकेंगे. कंपनियों की फोन की रिपेयरिंग भी किफायती बनानी होगी.

कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई जानकारों का मानना है कि नए नियमों से कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी. दरअसल, कंपनियां अभी ऐसे फोन डिजाइन कर रही हैं, जो लिमिटेड लाइफस्पैन के साथ आते हैं और यूजर को जरूरत न होने पर भी हर कुछ साल बाद फोन बदलना पड़ता है. इसके अलावा इस कदम से इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर भी कुछ लगाम लगने की उम्मीद है. दरअसल, हर साल फोन और उससे जुड़ी एक्सेसरीज के कारण भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा होता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक होता है.

भारत में यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

ये नए नियम अगले साल से यूरोपीय संघ में लागू होंगे. इन नियमों का सीधे तौर पर भारत के ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, एक जगह ये नियम लागू होने के बाद कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और दूसरी मार्केट्स के ग्राहक भी अपने लिए ऐसे फोन की डिमांड कर सकते हैं. 

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