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समंदर की केबल से एक देश से दूसरे देश जाता है इंटरनेट, कभी सोचा है Internet बनता कैसे है?
Internet in Submarine Cables: फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले ग्लास या प्लास्टिक के तारों से बनी होती है जिनके जरिए डेटा रोशनी के रूप में ट्रांसफर होता है.

- सैटेलाइट का उपयोग दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए होता है।
Internet in Submarine Cables: हम रोज़ाना इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं वीडियो देखने से लेकर मैसेज भेजने तक. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंटरनेट असल में बनता कैसे है? आसान भाषा में समझें तो इंटरनेट दुनिया भर के लाखों-करोड़ों कंप्यूटर, सर्वर और नेटवर्क का एक विशाल जाल है जो आपस में जुड़ा होता है. जब आप कोई वेबसाइट खोलते हैं तो आपका डिवाइस उस वेबसाइट के सर्वर से डेटा मांगता है और कुछ ही सेकंड में जानकारी आपकी स्क्रीन पर आ जाती है.
समंदर के नीचे बिछी होती हैं इंटरनेट की लाइफलाइन
बहुत से लोग सोचते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है लेकिन सच्चाई यह है कि दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा समंदर के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स से होकर गुजरता है. इन केबल्स को सबमरीन केबल कहा जाता है और ये हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं. यही केबल एक देश को दूसरे देश से जोड़ती हैं और ग्लोबल इंटरनेट नेटवर्क को संभव बनाती हैं.
फाइबर ऑप्टिक केबल क्या होती है?
फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले ग्लास या प्लास्टिक के तारों से बनी होती है जिनके जरिए डेटा रोशनी के रूप में ट्रांसफर होता है. जब आप कोई फोटो, वीडियो या मैसेज भेजते हैं तो वह इलेक्ट्रिक सिग्नल से लाइट सिग्नल में बदलकर इन केबल्स के जरिए यात्रा करता है. यही वजह है कि इंटरनेट इतनी तेज़ गति से काम करता है.
डेटा कैसे पहुंचता है एक देश से दूसरे देश?
मान लीजिए आप भारत में बैठकर अमेरिका की किसी वेबसाइट को खोलते हैं. आपका डेटा पहले आपके मोबाइल या कंप्यूटर से निकलकर आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर तक पहुंचता है. वहां से यह डेटा इंटरनेशनल नेटवर्क के जरिए समंदर के नीचे बिछी केबल्स में प्रवेश करता है और हजारों किलोमीटर दूर दूसरे देश के सर्वर तक पहुंचता है. फिर वही सर्वर आपको जवाब भेजता है जो उसी रास्ते से वापस आपके पास आता है.
क्या सैटेलाइट का कोई रोल नहीं है?
सैटेलाइट का इस्तेमाल भी इंटरनेट के लिए किया जाता है लेकिन यह मुख्य रूप से दूर-दराज के इलाकों में काम आता है जहां केबल पहुंचाना मुश्किल होता है. लेकिन तेज और स्थिर इंटरनेट के लिए आज भी फाइबर ऑप्टिक केबल्स ही सबसे भरोसेमंद मानी जाती हैं.
इंटरनेट के पीछे छिपा बड़ा नेटवर्क
इंटरनेट सिर्फ एक चीज़ नहीं बल्कि कई तकनीकों और नेटवर्क का मेल है. इसमें डेटा सेंटर, सर्वर, राउटर और केबल्स मिलकर काम करते हैं. बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर्स मिलकर इस नेटवर्क को बनाए रखते हैं ताकि दुनिया भर के लोग बिना रुकावट इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें.
इंटरनेट कोई जादू नहीं बल्कि एक बेहद एडवांस टेक्नोलॉजी का नतीजा है. समंदर के नीचे बिछी केबल्स से लेकर आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन तक, हर चीज़ एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. अगली बार जब आप इंटरनेट चलाएं तो समझिए कि आपका डेटा हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आपके पास पहुंच रहा है और यही है इंटरनेट की असली ताकत.
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