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Apps को इंस्टॉल करते वक्त आपसे ली जाती है ये जानकारियां, यहां किया जाता है आपके डेटा का इस्तेमाल

इन नियमों को बनाने में कई सालों का लंबा वक्त लगा है जिसके बाद सभी कंपनियां यूरोपियन यूनियन के मुताबिक अब नए सिरे से अपनी प्राइवेसी पॉलिसी लिख रही हैं. इन नियमों को अमेरिका और दूसरी जगहों पर भी फॉलो किया जाएगा जहां नियम थोड़े कमजोर हैं.

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक उस समय सदमें में आ गया जब उसे डेटा विवाद यानी की कैंब्रिज एनालिटिका का सामना करना पड़ा. डेटा विवाद के बाद फेसबुक ने जहां अपने प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के लिए कई तरह के बदलाव किए हैं जिसमें ये कहा गया कि अब कोई भी एप्स आपसे बिना पूछे आपका डेटा इस्तेमाल नहीं कर सकती. तो वहीं प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर यूरोप का नया डेटा प्राइवेसी नियम भी लागू हो चुका है. इस डेटा नियम के तहत जहां यूजर्स के डेटा प्राइवेसी को लेकर और सुविधा मिलेगी तो वहीं विज्ञापन के लिए दूसरी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए गए डेटा को लेकर अब कंपनी को जवाब देना होगा.

आपको बता दें इन नियमों को बनाने में कई सालों का लंबा वक्त लगा है जिसके बाद सभी कंपनियां यूरोपियन यूनियन के मुताबिक अब नए सिरे से अपनी प्राइवेसी पॉलिसी लिख रही हैं. इन नियमों को अमेरिका और दूसरी जगहों पर भी फॉलो किया जाएगा जहां नियम थोड़े कमजोर हैं.

तो अगर आपको अपने फोन में मौजूद एप्स को दिए जाने वाले डेटा को लेकर चिंता है और आप अगर उसे रोकना चाहते हैं तो ये रहा वो तरीका

डेटा एनालिटिका विवाद में इस बात का खुलासा हुआ था कि कई ऐसे एप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जो आपके डेटा को इक्ट्ठा और उसका इस्तेमाल कर राजनैतिक विचारो को बदल देती हैं.

इसके जवाब में फेसबुक ने कहा कि इसे हम 'ब्रिच ऑफ ट्रस्ट' कहते है जिसपर हमने रोक लगा दी है ताकि ऐसा कुछ दोबारा हमारे यूजर्स के साथ न हो सके. लेकिन कई यूजर्स ऐसे हैं जो पछता रहे होंगे कि एक एप को इस्टॉल और साइन अप करते समय न जाने उन्होंने अपनी कितनी सारी निजी जानकारी दे दी होगी.

आपका कितना डेटा APPS करते हैं इस्तेमाल?

इस सवाल का सिर्फ एक ही जवाब है. ढ़ेर सारा. अगर आप कुछ भी फ्री में साइन अप कर रहें हैं चाहे वो जीमेल हो या फेसबुक आप इसके जरिए अपनी कई सारी निजी जानकारी इन एप्स के साथ शेयर कर रहे हैं. साइन अप करते समय आपको ऐसा लगता है जैसे आप सिर्फ एप के लिए जानकारी दे रहें हैं लेकिन वास्तव में आप अपनी जानकारी को उस एप के जरिए थर्ड पार्टी को बेच रहे हैं. किसी भी एप को इंस्टॉल करते समय आपसे वो कई तरह की जानकारी मांगता हो और एप को जल्दी इंस्टॉल करने के चक्कर में बिना ध्यान दिए आप सबकुछ हां में करते जाते हैं जिसके बाद वो एप आपसे कुछ सेकेंड्स में ही आपकी पूरी जानकारी ले लेता है.

एप को दिए गए जानकारी को लेकर आपके पास दो उपाय हैं. पहला कि एप्स आपसे कौन सी जानकारी ले रहा है? दूसरा उस डेटा का इस्तेमाल उन एप्स द्वारा किस तरह से किया जा रहा है? चलिए गूगल को ही देख लीजिए गूगल में आप जो भी सर्च करते हैं या ब्राउज करते हैं. आप अपने रिकॉर्ड्स को देख सकते हैं. तो वहीं डेटा को भी बेच सकते हैं. लेकिन ये सारी चीजे उस जगह पर आकर रूक जाती है कि आप किस कंपनी या एप पर कितना विश्वास करते हैं.

क्या है टारेगट एडवर्टाइजिंग?

टारगेट एडवर्टाइजिंग एक ऐसा उपाय है जो वापस यूजर पर ही भारी पड़ सकता है. इसलिए आप ट्विटर, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर एड देखते हैं. ये सारे एड आपके पेज पर आपके द्वारा सर्च किए चीजों की मदद से आते हैं. जैसे मान लीजिए आपने किसी जूते के बारे में किसी वेबसाइट पर सर्च किया तो आप देखेंगे कि किसी और वेबासाइट पर आपको जूते के प्रचार दिखेंगे. एडवर्टाइजिंग की मदद से भी कई लोगों के डेटा लिए जाते हैं जिससे एक बात तो तय हो जाती है कि ऑनलाइन पर आपकी पर्सनालिटी कैसी है और आपके क्या देखना या खोजना पसंद है.

एक बात जो यूजर को नहीं पता कि वो जो भी एप्स फ्री में साइन अप करता है उसके लिए एक एड उस एप को पैसा देती है. जैसे मान लीजिए फेसबुक पर आपके लायक चीजें और मनपसंद एड दिख रहे हैं लेकिन सबकुछ फ्री है. दरअसल साइन अप के दौरान आपने जो जानकारी दी थी उसी कीमत पर एप आपकी सारी जानकारी थर्ड पार्टी को दे रहा है और थर्ड पार्टी उस साइट या एप पर आपकी मनपसंद की चीजें दिखा रहा है.

ये एप्स आपसे आपका नाम, आपका पता, आपकी उम्र, आपकी हॉबी, आपके माता- पिता का नाम, आपका सिक्योरिटी सवाल, आपकी जाति और दूसरे  प्रकार की कई जानकारियां अपने पास रखती है. जिससे एप को थर्ड पार्टी पैसा देता और थर्ड पार्टी उस एप पर एड को दिखाता है.

कैसे करें अपने डेटा को सेफ?

किसी भी एप को इंस्टॉल करते समय सबसे पहले एंड्रॉयड के सेटिंग्स में जाए और फिर एप और नॉटिफिकेशन को चुनें. परमिशन पर टैप करते ही आपको पता चल जाएगा कि आपने किन एप्स को अपनी निजी जानकारी की परमिशन दे रखी है. वहीं iOS के लिए आपको सेटिंग और एप पर क्लिक करना होगा.

आपको इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि आप किसी एप पर विश्वास कर सकते हैं और किसपर नहीं. इसके लिए आपको एप की डेटा प्राइवेसी और सेफ्टी को पढ़ने की जरूरत है जहां हर तरह की जानकारी होती है. अगर ऐसा कुछ एप में नहीं मिलता है तो तुरंत एप को फोन से हटा दें.

फेसबुक और ट्विटर पर अगर आप ज्यादा समय नहीं बिता रहा हैं तो थर्ड पार्टी के पास आपके डेटा को चुराने का कम मौका है. तो वहीं अगर आप किसी एप में फेसबुक और गूगल की मदद से साइन अप कर सोशल साइट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं तो आपका डेटा चोरी होने के ज्यादा आसार हैं. तो अगर आप भी अपने डेटा को सेफ रखना चाहते हैं तो ये स्टेप्स एक तरफ जहां आपको पर्सनल इंफॉर्मेशन शेयर करने से तो रोकेंगी ही साथ में आपको ये भी ध्यान देना होगा कि आप एप में कितना समय बिताते हैं और क्या एक्शन्स करते हैं तो वहीं आपके स्क्रीन पर कौन से एड दिख रहे हैं और किन एड्स को क्लिक आपके द्वारा क्लिक किया जा रहा है.

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