रोशनी से भी तेज ट्रैवल करता है अंधेरा? वैज्ञानिकों की इस नई खोज ने उड़ा दिए सबके होश
Speed of Light: वैज्ञानिकों ने सीधे अंधेरे को मापने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्होंने रोशनी के अंदर मौजूद खास बिंदुओं पर ध्यान दिया जिन्हें डार्क पॉइंट कहा जाता है.

Speed of Light: अब तक यह माना जाता रहा है कि ब्रह्मांड में रोशनी की गति से तेज कुछ भी नहीं चल सकता. लेकिन Albert Einstein के सिद्धांत को गहराई से समझें तो यह पूरी तरह सच नहीं है. उन्होंने यह कहा था कि कोई भी जानकारी (information) प्रकाश की गति से तेज नहीं जा सकती. यानी अगर कोई चीज बिना द्रव्यमान और बिना सूचना के हो तो वह इस सीमा को पार कर सकती है और इसी संदर्भ में अंधेरा यानी डार्कनेस को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है.
क्या होते हैं डार्क पॉइंट?
वैज्ञानिकों ने सीधे अंधेरे को मापने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्होंने रोशनी के अंदर मौजूद खास बिंदुओं पर ध्यान दिया जिन्हें डार्क पॉइंट कहा जाता है. ये ऐसे स्थान होते हैं जहां प्रकाश तरंग की तीव्रता शून्य हो जाती है यानी वहां पूरी तरह अंधेरा होता है. इन्हें नल पॉइंट भी कहा जाता है और ये रोशनी के बीच बने छोटे-छोटे खाली हिस्सों की तरह होते हैं.
रोशनी से तेज कैसे निकली ये गति
इन डार्क पॉइंट्स से एक खास तरह की संरचना बनती है जिसे वॉर्टेक्स कहा जाता है. इसे आप नदी में बनने वाले भंवर की तरह समझ सकते हैं जो पानी के बहाव से भी तेज घूमता है. इसी तरह, ये डार्क वॉर्टेक्स तकनीकी रूप से प्रकाश की गति से भी तेज चल सकते हैं. इस तरह की गति को सुपरल्यूमिनल कहा जाता है. यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Nature में प्रकाशित किया गया है.
कैसे किया गया यह एक्सपेरिमेंट
इस खोज को साबित करना आसान नहीं था. इसके लिए वैज्ञानिकों ने बेहद एडवांस माइक्रोस्कोपी और लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया. उन्होंने एक खास मटेरियल हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड (hBN) का इस्तेमाल किया जिसमें प्रकाश की गति धीमी होकर पोलैरिटॉन नाम की स्थिति में बदल जाती है. यह एक तरह का हाइब्रिड कण होता है जिसमें प्रकाश और पदार्थ दोनों के गुण होते हैं. इस अवस्था में ही डार्क पॉइंट्स को रोशनी से तेज चलते हुए देखा जा सका.
क्या बदल सकती है यह खोज
इस रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज केवल रौशनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रकृति के कई अन्य सिस्टम्स जैसे साउंड वेव, तरल प्रवाह और सुपरकंडक्टर्स को समझने में भी मदद कर सकती है. यह नई तकनीक भविष्य में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के छिपे हुए और तेज प्रक्रियाओं को समझने का रास्ता खोल सकती है.
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Source: IOCL


























