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डेटा सेंटर के मामले में कहां खड़ा है भारत? जानें आंकड़े

Data Center In India: डेटा सेंटर के मामले में भारत दुनियाभर में छठे स्थान पर है. एआई बूम के बाद गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियां तेजी से भारत में निवेश कर रही हैं.

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  • मेटा, गूगल जैसी कंपनियां भारत में डेटा सेंटर बना रही हैं।
  • भारत में डेटा सेंटर क्षमता 1.6 गीगावाट पार, एशिया में दूसरा।
  • 2030 तक क्षमता 12 गीगावाट होगी, 26.3 GW बिजली चाहिए।
  • बढ़ती इंटरनेट और AI खपत से भारत आकर्षक बाजार बना।

Data Center In India: बाकी दुनिया की तरह भारत में इन दिनों डेटा सेंटर बनाने की रफ्तार तेज हुई है. अमेरिकी कंपनी मेटा ने जामनगर में रिलायंस के बनाए 168 मेगावॉट के एआई डेटा सेंटर को लीज पर लेने का ऐलान किया था. गूगल भी विशाखापट्टनम में बड़ा एआई डेटा सेंटर बनाने का काम शुरू कर चुकी है. ग्लोबल डेटा सेंटर ऑपरेटर कंपनी AirTrunk ने भारत में अगले 4 सालों में 3 ट्रिलियन रुपये के निवेश की घोषणा की है. इस पैसे को एआई डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खर्च किया जाएगा. यह दिखाता है कि दुनियाभर की कंपनियों की नजरें भारत पर टिकी हुई हैं और वो 140 करोड़ लोगों वाले इस देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही हैं. आज हम भारत में डेटा सेंटर की संख्या और इसकी कैपेसिटी के बारे में विस्तार से बात करने जा रहे हैं. 

क्या होता है डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर एक स्पेशलाइज्ड फैसिलिटी होती है, जहां पर वेबसाइट, क्लाउड सर्विसेस और एआई ऐप्स को चलाने के लिए जरूरी हजारों कंप्यूटर, स्टोरेज सिस्टम और दूसरे नेटवर्किंग इक्विपमेंट रखे जाते हैं. बड़े-बड़े सर्वरों को चलाने के लिए इन्हें बिजली की जरूरत होती है. सर्वर चलने पर हीट जनरेट होती है, जिसके लिए इनमें बड़े-बड़े कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जो एक शहर के बराबर पानी की खपत करते हैं. डेटा सेंटर वर्षों से मौजूद हैं, लेकिन एआई बूम के बाद इनकी जरूरत और संख्या तेजी से बढ़ रही है. 

भारत में इस समय कितने डेटा सेंटर?
डेटा सेंटर के मामले में कहां खड़ा है भारत? जानें आंकड़े

Statista की रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल, 2026 तक भारत में डेटा सेंटर की संख्या 296 थी. इस लिहाज से भारत अमेरिका, यूके, जर्मनी, चीन और फ्रांस के बाद सबसे ज्यादा डेटा सेंटर वाले देशों की लिस्ट में छठे स्थान पर है. हालांकि, डेटा सेंटर की संख्या से ही किसी देश की कंप्यूटिंग पावर का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. इसके लिए कैपेसिटी को मेगावॉट में मापा जाता है. इससे पता चलता है कि कोई डेटा अपने सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, एआई चिप्स और कूलिंग इक्विपमेंट को पावर देने के लिए कितनी बिजली खपत करता है. ज्यादा कैपेसिटी का मतलब है कि डेटा सेंटर ज्यादा कंप्यूटिंग वर्कलोड को सपोर्ट कर सकता है.

अगर कैपेसिटी की बात करें तो भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. 2020 में भारत की डेटा सेंटर कैपेसिटी 375 मेगावॉट थी, जो 2025 में बढ़कर 1.5 गीगावॉट हो गई. हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कैपेसिटी 1.6 गीगावॉट को भी पार कर गई है. इस हिसाब से भारत एशिया पैसिफिक रीजन की दूसरी सबसे बड़ी ऑपरेशनल डेटा सेंटर मार्केट है. कैपेसिटी में विस्तार अभी थमने वाला नहीं है. अनुमान लगाए जा रहे हैं कि भारत की ऑपरेशनल डेटा सेंटर कैपेसिटी 2030 तक बढ़कर 12 गीगावॉट हो सकती है. इस दौरान एआई डेडिकेटेड कैपेसिटी भी 275 मेगावॉट से बढ़कर 6,546 मेगावॉट होने की उम्मीद है. 

डेटा सेंटर के साथ बढ़ रही बिजली की खपत
डेटा सेंटर के मामले में कहां खड़ा है भारत? जानें आंकड़े

जैसे-जैसे देश में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर बढ़ रहे हैं, उसी हिसाब से बिजली की खपत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. सरकार ने संसद को बताया है कि 2031-32 तक देश में एआई डेटा सेंटर को 26.3 GW बिजली की जरूरत पड़ेगी. इस डिमांड को ज्यादातर रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा किया जाएगा. पावर मिनिस्ट्री का कहना है कि डेटा सेंटर की जरूरतों को देखते हुए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जा रहा है और इसके साथ-साथ नई पावर जनरेशन कैपेसिटी भी जोड़ी जा रही है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ऑथोरिटी का अनुमान है कि भारत में FY 2032 में बिजली की पीक डिमांड 388 GW पहुंच सकती है.

इसलिए कंपनियों को लुभा रहा भारत

गूगल, मेटा, HCLTech और Microsoft समेत सभी बड़ी कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक बाजार बना हुआ है. लगातार बढ़ते हुए इंटरनेट यूजर बेस और तेजी से हो रहे एआई एडॉप्शन के चलते भारत डेटा सेंटर के लिए एक प्रमुख स्थान बनता जा रहा है. मौजूदा स्थिति की बात करें तो महाराष्ट्र और तमिलनाडु में सबसे ज्यादा डेटा सेंटर बने हुए हैं. अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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