AI बना देवदूत! पहाड़ों में लापता इटली के पर्वतारोही को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने ढूंढ निकाला, जानिए पूरा मामला
Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अक्सर अपने खतरों, गलत इस्तेमाल या विवादों की वजह से सुर्खियों में रहता है.

Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अक्सर अपने खतरों, गलत इस्तेमाल या विवादों की वजह से सुर्खियों में रहता है. कहीं AI को इंसानों के लिए खतरा बताया जाता है तो कहीं उस पर अश्लील या भ्रामक कंटेंट बनाने के आरोप लगते हैं. लेकिन इसी तकनीक ने कई बार ऐसे काम भी किए हैं, जो इंसानी क्षमताओं से कहीं आगे जाकर जान बचाने में मददगार साबित हुए हैं. इटली से सामने आई एक घटना ने यह दिखा दिया कि सही मौके पर इस्तेमाल किया जाए तो AI किसी वरदान से कम नहीं है.
एक अनुभवी पर्वतारोही अचानक हो गया गायब
यह मामला इटली के जाने-माने पर्वतारोही और ऑर्थोपेडिक सर्जन निकोला इवाल्डो से जुड़ा है. सितंबर 2024 की एक रविवार सुबह वह अकेले पहाड़ों की ओर निकले थे, लेकिन उन्होंने किसी को यह नहीं बताया कि वे कहां जा रहे हैं. जब काफी समय तक उनका कोई पता नहीं चला, तो चिंता बढ़ने लगी.
कुछ समय बाद रेस्क्यू टीम को उनकी कार एक गांव में खड़ी मिली. इससे अंदाजा लगाया गया कि वे कॉटियन आल्प्स की दो मशहूर चोटियों में से किसी एक पर चढ़ने गए होंगे.
शुरुआती तलाश नाकाम, बर्फ ने बढ़ाई मुश्किल
इवाल्डो की तलाश में करीब 50 रेस्क्यूकर्मी पैदल पहाड़ों में उतरे. लगभग एक हफ्ते तक सर्च ऑपरेशन चला और हेलिकॉप्टर से भी इलाके की कई बार जांच की गई. लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला. इसी बीच सितंबर के आखिर में बर्फबारी शुरू हो गई जिससे हालात और खराब हो गए. मजबूरन रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा.
बर्फ पिघली तो AI और ड्रोन की हुई एंट्री
करीब 10 महीने बाद, जुलाई 2025 में जब बर्फ पिघली, तब दोबारा खोज अभियान शुरू किया गया. इस बार रेस्क्यू टीम ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. ड्रोन ऑपरेटर्स को बुलाया गया और साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया जो हजारों तस्वीरों का विश्लेषण कर सकता था.
ड्रोन की मदद से इलाके की 2,600 से ज्यादा हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें ली गईं. इन सभी तस्वीरों को AI सिस्टम में डाला गया, जिसने कुछ ही घंटों में हर इमेज को पिक्सल दर पिक्सल जांचना शुरू कर दिया.
AI ने पकड़ा वो सुराग जो इंसान से छूट गया
AI सॉफ्टवेयर ने कई ऐसी चीजें चिन्हित कीं, जो प्राकृतिक वातावरण से अलग लग रही थीं. इनमें से कुछ संकेतों की जांच इंसानी विशेषज्ञों ने की. इसी दौरान एक तस्वीर में AI ने लाल रंग की एक संदिग्ध वस्तु को चिन्हित किया.
जब उस जगह ड्रोन भेजा गया तो पता चला कि वह निकोला इवाल्डो का हेलमेट था. इसी अहम सुराग के आधार पर रेस्क्यू टीम ने आगे खोज तेज की और आखिरकार लापता डॉक्टर का शव ढूंढ लिया गया.
रेस्क्यू में AI की ताकत लेकिन सीमाएं भी
यह पहली बार नहीं है जब बचाव कार्यों में AI का इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं. कभी-कभी AI गलत संकेत दे सकता है, तस्वीरों को लेकर भ्रम पैदा कर सकता है या अलग-अलग इलाकों में सही तरीके से काम न करे. इसलिए इसे लगातार बेहतर बनाने और ट्रेनिंग की जरूरत होती है.
भविष्य में और जानें बचा सकता है AI
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे मशीन लर्निंग सिस्टम्स को अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में ट्रेन किया जाएगा, वैसे-वैसे इनकी सटीकता और बढ़ेगी. आने वाले समय में AI और ड्रोन जैसी तकनीकें उन जगहों पर भी उम्मीद की किरण बन सकती हैं, जहां इंसानों का पहुंचना बेहद मुश्किल होता है.
इटली की यह घटना साफ दिखाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि सही इस्तेमाल होने पर जिंदगी और मौत के बीच फर्क पैदा करने वाला टूल भी बन सकता है.
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Source: IOCL






















