Array Link Technology: चला गया छत पर लगी गोल छतरी का जमाना, अब डिश एंटीना की जगह लेगा Array Link; जानें टेक्नोलॉजी?
Array Link Technology: Array Link एक नई सैटेलाइट तकनीक है जो पारंपरिक डिश एंटीना की जगह ले सकती है. जो दावा करती है कि तेज इंटरनेट, बेहतर कनेक्टिविटी और बिना रुकावट डेटा ट्रांसफर देगी.

Array Link Technology: अक्सर सभी ने देखा होगा कि घर हो या ऑफिस या टीवी स्टेशन की छत पर एक बड़ी सी गोल छतरी जैसा एंटीना डिश होता है, जिसे Parabolic Antenna या Satellite Dish कहा जाता है. जहां आज इंटरनेट का इस्तेमाल करना हो या ट्रैकिंग करनी हो, टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गई है कि अंतरिक्ष से डायरेक्ट हमारे फोन तक कनेक्शन बनाने के लिए हजारों सैटेलाइट दुनिया भर में उपलब्ध हैं. लेकिन आज तक सैटेलाइट को धरती से जोड़ने के लिए आज भी 1970 के दशक में जो Parabolic Antenna का आविष्कार हुआ था, वही पुरानी तकनीक आज तक चलती आ रही है. जिसकी सबसे बड़ी खराबी है कि एक समय पर एक ही सैटेलाइट को ट्रैक कर सकते हैं, साथ ही महंगे भी बहुत होते हैं.
लेकिन अब वो समय आ गया है जिससे शायद इस समस्या से राहत मिल सकती है. हाल ही में University of California, San Diego (UCSD) के वैज्ञानिकों ने एक अद्भुत टेक्नोलॉजी बनाई है, जिसे ArrayLink के नाम से जाना जाएगा. माना जा रहा है कि यह टेक्नोलॉजी गोल डिश एंटीना का एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प बन सकती है. वहीं वैज्ञानिकों की बताई गई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस टेक्नोलॉजी की वजह से इंटरनेट की स्पीड और भी कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है.
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क्या है Array Link Technology
अगर बात करें सैटेलाइट की स्पीड की तो पृथ्वी के LEO यानी Low Earth Orbit में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड इतनी तेज होती है कि उनको ट्रैक करना पुराने एंटीना के बस की बात नहीं रह गई है. साथ ही जब एक डिश एक सैटेलाइट को छोड़कर दूसरे से जुड़ने की कोशिश करता है तो बीच में कुछ सेकंड या मिनट्स के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी भी टूट जाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार LEO में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड 28,000 km/h होती है.
वैज्ञानिकों के अनुसार इसी समस्या को दूर करती है ArrayLink Technology, जो पुरानी टेक्नोलॉजी को पूरी तरह बदल देती है. बताया जा रहा है कि इसके लिए किसी डिश का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है बल्कि एक लैपटॉप जैसे छोटे और फ्लैट डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है, जिसे Phased Array कहते हैं. इनकी खासियत है कि यह बिना हिले-डुले Radio Waves को सिग्नलों की दिशा बदलकर सैटेलाइट को ट्रैक करती है. इससे फायदा होगा कि डेटा ट्रांसफर बिना किसी रुकावट के लगातार होता रहेगा. आसान भाषा में समझें तो जहां पुराना डिश एंटीना आसमान में दौड़ते सैटेलाइट के पीछे खुद घूमता था, वहीं यह नया फ्लैट डिवाइस बिना अपनी जगह से हिले, अपनी Waves को मोड़कर सैटेलाइट से जुड़ देगा. जिससे बिना रुकावट वाला सुपरफास्ट इंटरनेट मिलेगा और कनेक्शन नहीं टूटेगा.
कैसे देता है ज्यादा स्पीड?
विशेषज्ञों ने बताया कि इसमें बड़ा डिश एंटीना बनाने की बजाय उन्होंने छोटे-छोटे 16 एंटीना पैनल्स को एक किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग घरों की छतों या टावरों पर फैला दिया और उन्हें सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में जोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि ये अलग-अलग एंटीना एक टीम की तरह काम करते हैं, जब ये एक साथ मिलते हैं तो इनकी ताकत एक बहुत बड़े डिश एंटीना के बराबर हो जाती है.
जब इस नई टेक्नोलॉजी का टेस्ट किया गया तो पता चला कि छोटे एंटीना पैनल्स का यह नया नेटवर्क पुराने एंटीना के मुकाबले 3 गुना ज्यादा तेजी से डेटा ट्रांसफर कर सकता है. यानी अब बिना अटके भारी-भरकम डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड हो सकेंगे और वीडियो कॉलिंग से लेकर स्ट्रीमिंग तक सब कुछ सुपरफास्ट हो जाएगा.
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीक की सबसे खास बात है कि इन्हें सेटअप करने के लिए किसी तरह के महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं है. इसे किसी भी इमारत की छत, मोबाइल टावर या ऑफिस बिल्डिंग पर लगाया जा सकता है. इससे मोबाइल टावर आसानी से सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन में बदल जाएंगे. साथ ही इससे सैटेलाइट कंपनियों की लागत कम होगी, उन्हें अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं कराना होगा. वहीं आने वाले समय में लोगों को इससे लिमिटेड प्राइस में हाई स्पीड इंटरनेट और Direct-to-Phone Connectivity मिल सकती है.
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