CJP के प्रदर्शन और लाठीचार्ज पर रोहिणी आचार्य ने कही दिल जीत लेने वाली बात, 'सरकार को…'
CJP Protest Parliament March: रोहिणी आचार्य ने कहा कि समाधान संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं. उन्होंने विरोध-प्रदर्शन को संवैधानिक अधिकार करार दिया है.

संसद भवन मार्च के दौरान सोमवार (20 जुलाई, 2026) को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर पुलिस ने लाठी चटकाई. आंसू गैस के गोले दागे गए. कई युवाओं को चोटें आईं. इस प्रदर्शन और लाठीचार्ज पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने दिल जीत लेने वाली बात कही है.
रोहिणी आचार्य ने लाठीचार्ज का एक वीडियो अपने एक्स हैंडल से शेयर किया. इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, "असहमति का जवाब संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं..."
पोस्ट में वे आगे लिखती हैं, "लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों, राजनीतिक दलों एवं समूहों का संवैधानिक अधिकार है. प्रदर्शनकारियों पर सरकार के द्वारा करवाया गया लाठीचार्ज एवं किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई, संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर हमला है. असहमति की उठी हर आवाज का समाधान संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं."
असहमति का जवाब संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) July 20, 2026
लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों, राजनीतिक दलों एवं समूहों का संवैधानिक अधिकार है। प्रदर्शनकारियों पर सरकार के द्वारा करवाया गया लाठीचार्ज एवं किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई , संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की… pic.twitter.com/SDSGc7Xh5D
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रोहिणी बोलीं- 'सरकार को…'
रोहिणी ने कहा, "जायज सवालों और मुद्दों के साथ किए जा रहे हर विरोध-प्रदर्शन पर पारदर्शिता और संयम बरतते हुए सरकार को विधि के शासन के माध्यम से काम करना चाहिए लेकिन गंभीर चिंता की बात है कि मोदी सरकार ने अपने 12 वर्षों के शासनकाल में सिर्फ और सिर्फ तानाशाही तौर-तरीकों व पुलिसिया दमन के माध्यम से ही हरेक विरोध प्रदर्शन को कुचलने-दबाने की कोशिश की है."
'आरएसएस और नागपुरिया ताकतों ने…'
दूसरी ओर आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सरकार को घेरा है. उन्होंने अपने एक एक्स पोस्ट के जरिए कहा, "दिल्ली में बैठे बड़बोले सत्ताधीश और उनके पालतू तंत्र कान खोलकर सुन लें! सड़कों पर अपना हक मांग रहे देश के नौजवान कोई अपराधी नहीं हैं. यह उस सड़ी-गली और बेईमान शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का जायज आक्रोश है, जिसे आरएसएस और नागपुरिया ताकतों ने पूरी तरह से अपनी जागीर बना लिया है."
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