AI Digital Avatar : AI अवतार से कंपनियां पढ़ रहीं आपकी पर्सनैलिटी! अमेरिकी स्टार्टअप का खुलासा
AI Digital Avatar : अब एक अमेरिकी एआई स्टार्टअप ने ऐसा तरीका तैयार किया है, जिसके जरिए बिना किसी व्यक्ति से सीधे बात किए भी उसकी पर्सनैलिटी और पसंद को समझा जा सकता है.

AI Digital Avatar : आज के समय में किसी भी कंपनी के लिए यह जानना सबसे जरूरी होता है कि लोग उसके प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में क्या सोचते हैं. इसके लिए कंपनियां आमतौर पर लंबे समय तक सर्वे, इंटरव्यू और मार्केट रिसर्च कराती हैं, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है, लेकिन अब एक अमेरिकी एआई स्टार्टअप ने ऐसा तरीका तैयार किया है, जिसके जरिए बिना किसी व्यक्ति से सीधे बात किए भी उसकी पर्सनैलिटी और पसंद को समझा जा सकता है. कंपनी का दावा है कि उसकी एआई तकनीक लोगों के डिजिटल अवतार के जरिए काफी हद तक सही नतीजे देने में सक्षम है.
क्या है अमेरिकी स्टार्टअप का दावा?
सिलिकॉन वैली की एआई स्टार्टअप सिमिली ने दावा किया है कि उसने ऐसी तकनीक तैयार की है, जिसकी मदद से इंसानों के डिजिटल या एजेंटिक ट्विन्स (AI Twins) बनाए जा सकते हैं. कंपनी के अनुसार ये एआई अवतार किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी , सोच और पसंद को समझकर किसी प्रोडक्ट, ब्रांड या नई नीति पर उसकी संभावित प्रतिक्रिया बता सकते हैं. इससे कंपनियों को बार-बार बड़े स्तर पर सर्वे कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
मरीजों के व्यवहार को ऐसे समझा गया
अमेरिका की हेल्थकेयर कंपनी सीवीएस हेल्थ यह जानना चाहती थी कि मरीज डॉक्टर कू लिखी गई दवाएं समय पर क्यों नहीं लेते. इसके लिए कंपनी ने करीब 4 लाख एआई से तैयार डिजिटल अवतारों के डेटा का विश्लेषण किया. सिमिली की तकनीक ने कुछ ही मिनटों में मरीजों की पर्सनैलिटी से जुड़ी जरूरी वजहों की पहचान कर ली और बिना बड़े सर्वे के जरूरी नतीजे उपलब्ध करा दिए. कंपनी अब केवल सर्वे तक सीमित नहीं रहना चाहती, वह ऐसी तकनीक पर काम कर रही है, जिसमें एआई अवतार किसी प्रोडक्ट का समय के साथ इस्तेमाल करेंगे और फिर अपने एक्सपीरियंस भी शेयर कर सकेंगे. कंपनी का मानना है कि फ्यूचर में कंपनियां ग्राहकों की पसंद और राय जानने के लिए सीधे लोगों से नहीं, बल्कि उनके एआई अवतारों से बातचीत कर सकती हैं.
कैसे शुरू हुई इस तकनीक की कहानी?
सिमिली की शुरुआत 32 वर्षीय जून संग पार्क ने की, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने ऐसी तकनीक पर काम किया, जो इंसानों की तरह सोचने और व्यवहार करने वाले डिजिटल किरदार तैयार कर सके. यह विचार लोकप्रिय सिम्स गेम से प्रेरित था. उनका मानना था कि अगर अलग-अलग परिस्थितियों को डिजिटल दुनिया में आजमाया जाए, तो लोगों के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है और कई समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है.
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मॉडल को कैसे किया गया तैयार?
कंपनी ने शुरुआत में अलग-अलग वर्गों के 1,000 लोगों के करीब दो-दो घंटे के इंटरव्यू लेकर अपने एआई मॉडल को ट्रेन किया. इसके बाद गैलप जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर दुनिया भर के लाखों लोगों के व्यवहार से जुड़े डेटा को अपने सिस्टम में शामिल किया. इसी आधार पर कंपनी ने अपने एआई डिजिटल ट्विन्स को तैयार किया. इस तकनीक को अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद, एक साल पुराने इस स्टार्टअप को 1,910 करोड़ रुपये की नई फंडिंग मिली. इसके बाद कंपनी की कुल वैल्यूएशन 19,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
कितने सटीक हैं एआई अवतार?
सिमिली की प्रोडक्ट हेड मिहिका कपूर के मुताबिक, अलग-अलग परिस्थितियों और अलग-अलग लोगों के समूहों पर किए गए परीक्षणों में एआई एजेंट्स के जवाब 85 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक सटीक पाए गए. उनका कहना है कि यह तरीका पारंपरिक मार्केट रिसर्च की तुलना में ज्यादा तेज और कम खर्च वाला है.
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