गंगोत्री में शहीद सैनिकों के लिए गंगा तट पर की गई पूजा, तीर्थ पुरोहित बोले- शहादत बेकार न जाए
उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों ने में भारत-चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों की आत्मा की शांति के लिए पूजा की. गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि तीर्थ पुरोहित गंगोत्री धाम में 108 दीप जलाकर जवानों को श्रद्धांजलि भी दी.

उत्तरकाशी, एजेंसी। गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों ने लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए शुक्रवार को गंगा तट पर पूजा की. तीर्थ पुरोहितों ने मां गंगा से इस घड़ी में शहीद जवानों के परिवारों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि जवानों की शहादत बेकार न जाए और इसका बदला चीन से लिया जाए. गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि तीर्थ पुरोहित गंगोत्री धाम में 108 दीप जलाकर जवानों को श्रद्धांजलि भी दी. गंगोत्री धाम भी चीन सीमा से लगे क्षेत्र में स्थित है और हर्षिल आर्मी कैम्प से गंगोत्री धाम की दूरी महज 18 किलोमीटर है.
गौरतलब है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 जवान शहीद हो गए थे. जवानों की शहादत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि शहीद जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. भारत शांति चाहता है. कोई भी देश भ्रम में न रहे. हम किसी को उकसाते नहीं हैं, लेकिन उकसाने पर मुंहतोड़ जवाब देना हमें आता है. पीएम मोदी ने कहा था कि भारत शांति चाहता है, वीरता हमारे देश के चरित्र का हिस्सा है.

बता दें कि, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उच्च स्तरीय बैठक के बाद तीनों बलों के लिए अलर्ट का स्तर बढ़ाने का निर्णय किया गया है. अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास अग्रिम मोर्चे पर तैनात सभी ठिकानों और टुकड़ियों के लिए सेना पहले ही अतिरिक्त जवानों को भेज चुकी है. भारतीय वायु सेना भी अग्रिम मोर्चे वाले अपने सभी ठिकानों अलर्ट बढ़ाते हुए एलएसी पर नजर रख रही है. वहीं, चीनी नौसेना को कड़ा संदेश देने के लिए भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती बढ़ा रही है.
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