BHU में बरगद और पीपल के पेड़ की पूजन पद्धति पर रोक लगाने की मांग, कुलपति को लिखा गया पत्र
Varanasi News In Hindi: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी परिसर में लगे बरगद और पीपल के पेड़ की पूजन पद्धति पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भी लिखा गया है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU Varanasi) अध्ययन का बड़ा केंद्र के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और प्राचीन विरासत के लिए भी पहचाना जाता है. मगर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा में ब्राह्मणवाद को लेकर पूछे गए सवाल का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब एक और लेटर की वजह से यूनिवर्सिटी चर्चाओं में आ गई है.
दरअसल, बीते 24 घंटे में काशी हिंदू यूनिवर्सिटी परिसर दो अलग-अलग विषयों के लिए चर्चा में है. पहले तो सेमेस्टर परीक्षा में ब्राह्मणवाद को लेकर सवाल पूछा जाता है. वहीं, दूसरी तरफ इसी विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने कुलपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय परिसर के पीपल बरगद के पेड़ के पास दिया ना जलाने और धागा न बाधने की अपील की है.
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पीपल और बरगद के पेड़ में धागा न बांधने की अपील
एबीपी लाइव को मिले एक पत्र के अनुसार, वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित केंद्रीय कार्यालय के आशीष कुमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखा है. पत्र के माध्यम से उन्होंने परिसर के पीपल बरगद के पेड़ के पास दिया न जलाने और धागा न बांधने की अपील की है.
'धागा बांधना और दिया जलाना पेड़ को पहुंचाते हैं क्षति'
पत्र में उन्होंने लिखा है कि- BHU परिसर में स्थित पीपल एवं बरगद के पेड़ पर्यावरण संरक्षण एवं ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं .लेकिन कुछ लोग धार्मिक भावना से इन पेड़ों पर धागा बांधते हैं और दिया जलाते हैं जिससे पेड़ों को गंभीर क्षति पहुंचती है.
पत्र में बताया गया कि धागा छाल में घुसकर वृद्धि रोकता है एवं संक्रमण फैलाता है, जबकि दिया जलाने में छल जलती है एवं जड़ प्रदूषित होती है. वैज्ञानिक रूप से यह पेड़ों की आयु एवं स्वास्थ्य को हानि पहुंचाती है. इसलिए अनुरोध है कि कैंपस में इन पेड़ों पर धागा बांधने एवं दिया जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए, यह कैंपस को हरा-भरा बनाए रखने में सहायक होगा.
भारतीय सनातन परंपरा के लिए जाना जाता है BHU
गौरतलब है कि वाराणसी का काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर अपनी विराट शैक्षणिक परंपरा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों के लिए भी जाना जाता है. विश्वविद्यालय परिसर में काशी विश्वनाथ मंदिर के नाम से एक विशाल धर्मस्थल को भी स्थापित किया गया है.
इसके अलावा यहां हर एक प्रमुख तिथियों पर सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं. न सिर्फ यहां पर छात्रों का पोशाक संयमित दिनचर्या बल्कि यहां पढ़ने वाले प्रत्येक छात्रों के मन मे भारतीय परंपरा के प्रति एक अटूट विश्वास भी माना जाता है. ऐसे में अब विश्वविद्यालय परिसर से ही यह पत्र अनेक सवाल खड़ा कर रहा है.
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