Hemkund Sahib Yatra 2026: हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की श्रद्धालुओं से अनुशासन और सद्भाव की अपील, शस्त्र न लाने की हिदायत
Hemkund Sahib Yatra 2026: हेमकुंड साहिब ट्रस्ट ने कहा है कि यात्रा का असली मकसद आस्था और आत्मशांति है, इसलिए हर श्रद्धालु धार्मिक मर्यादा, आपसी सद्भाव और अनुशासन को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाए.

श्री हेमकुंड साहिब यात्रा इन दिनों पूरे जोश के साथ जारी है. इसी बीच गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं से एक जरूरी अपील की है. उन्होंने कहा है कि यात्रा का असली मकसद आस्था और आत्मशांति है, इसलिए हर श्रद्धालु धार्मिक मर्यादा, आपसी सद्भाव और अनुशासन को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाए.
शस्त्र लेकर न आएं, बच्चों का विशेष ध्यान रखें
ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि श्रद्धालु यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से शस्त्र साथ न लाएं. सरदार सेवा सिंह ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म में शस्त्रों का स्थान सम्मानजनक है और वे धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं, न कि किसी विवाद या दिखावे का साधन. यात्रा जैसे पवित्र अवसर पर उनका दुरुपयोग किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि जो परिवार बच्चों को साथ लेकर आ रहे हैं, वे इस बात का खयाल रखें कि छोटे बच्चों के हाथों में किसी भी प्रकार के शस्त्र न हों.
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देवभूमि की शांति बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी
ट्रस्ट के संदेश में उत्तराखंड की पहचान का भी जिक्र किया गया. सरदार सेवा सिंह ने कहा कि यह वह भूमि है जिसे सदियों से देवभूमि कहा जाता है जहां बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे महातीर्थ हैं. इन्हीं पावन स्थलों में हेमकुंड साहिब का भी विशेष धार्मिक महत्व है. ऐसे में यहां की शांति और सौहार्द को बनाए रखना हर श्रद्धालु की नैतिक जिम्मेदारी है.
उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा मार्ग पर किसी भी तरह के वाद-विवाद से बचा जाए. अगर कोई समस्या या शिकायत हो तो कानून को हाथ में लेने के बजाय संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें. सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं.
आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी
सरदार सेवा सिंह का यह संदेश किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सतर्क और जिम्मेदार अपील है ताकि यात्रा का पूरा माहौल श्रद्धामय बना रहे. हेमकुंड साहिब जैसे दुर्गम और ऊंचाई पर स्थित तीर्थ तक पहुंचना अपने आप में एक कठिन यात्रा है. ऐसे में जो थोड़ी सी ऊर्जा और समय मिले, वह आस्था में लगे न कि किसी विवाद में. ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे यात्रा को पूरी श्रद्धा, सेवाभाव और अनुशासन के साथ संपन्न करें.
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