चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी को प्रशासक पद से हटाया गया, डीएम बने नए प्रशासक
Uttarakhand News: चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष रंजनी भंडारी को प्रशासक के पद से हटा दिया गया है. रंजनी भंडारी की जगह से चमोली जिलाधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया गया है.

Chamoli News: उत्तराखंड सरकार ने चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी को प्रशासक पद से हटाने का फैसला लिया है. उनकी जगह अब चमोली के जिलाधिकारी (District magistrate) को प्रशासक नियुक्त किया गया है. राज्य सरकार ने इससे पहले प्रदेश के 13 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाया था, लेकिन अब इस निर्णय में बदलाव करते हुए रजनी भंडारी को पद से हटा दिया गया है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में उनके पति और पूर्व बद्रीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ले ली थी. उनके दल-बदल के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई थी, जिसके बाद उपचुनाव हुए और कांग्रेस प्रत्याशी बुटोला ने जीत दर्ज की. इस घटनाक्रम के बाद अब सरकार द्वारा रजनी भंडारी को प्रशासक पद से हटाने का निर्णय कई सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
कार्रवाई पर राजनीतिक विश्लेषकों ने क्या कहा?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में पंचायत चुनावों की तैयारियां शुरू हो रही हैं. ऐसे में इस तरह का फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है. रजनी भंडारी के हटने के बाद अब जिला पंचायत प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी तरह से जिलाधिकारी (डीएम) के हाथों में आ गई है. डीएम को प्रशासक बनाए जाने से जिला प्रशासन की भूमिका और अधिक मजबूत हो सकती है, लेकिन यह भी देखा जाएगा कि इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. कई पंचायत प्रतिनिधियों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा है कि जिला पंचायत प्रशासन में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका अहम होती है.
इस पूरे घटनाक्रम का असर उत्तराखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है. रजनी भंडारी को हटाए जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अन्य जिला पंचायत अध्यक्षों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई हो सकती है? साथ ही, बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी भी तेज हो सकती है. रजनी भंडारी को प्रशासक पद से हटाए जाने का फैसला निश्चित रूप से उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है. सरकार के इस निर्णय के पीछे क्या कारण हैं, यह स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे हालिया राजनीतिक घटनाओं से जोड़कर देख रहे हैं.
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस फैसले का स्थानीय प्रशासन और पंचायत विकास कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है, और क्या यह मामला आगे चलकर राजनीतिक रूप से और बड़ा रूप ले सकता है. फिलहाल, प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन यह मामला अभी और चर्चा में बना रहेगा.
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