उत्तराखंड में मदरसों को लेकर हड़कंप, CM धामी के आदेश पर बच्चों की एंट्री पर सख्त होगी वेरिफिकेशन
Dehradun News In Hindi: अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के DM को निर्देश भेजे हैं कि जिलों में वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई जाए.

- उत्तराखंड में बाहरी बच्चों को मदरसों में लाने के वायरल वीडियो की जांच.
- मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को मदरसों के व्यापक सत्यापन के निर्देश दिए.
- बच्चों, अभिभावकों और लाने वालों की पृष्ठभूमि की गहनता से होगी जांच.
- जुलाई से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड समाप्त, शिक्षा बोर्ड से संबद्धता अनिवार्य.
उत्तराखंड में इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने सरकार की नींद उड़ा दी है. वीडियो में दावा किया गया है कि बाहरी राज्यों के बच्चों को प्रदेश के मदरसों में लाया जा रहा है. मामला सामने आते ही शासन हरकत में आ गया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल जांच के निर्देश जारी कर दिए.
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को निर्देश भेजे हैं कि अपने-अपने जिलों में व्यापक वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई जाए. इन चारों जिलों को इसलिए प्राथमिकता दी गई है क्योंकि प्रदेश के अधिकांश मदरसे इन्हीं जिलों में संचालित हैं.
बच्चों-अभिभावकों-लाने वाले का चेक होगा बैकग्राउंड
जांच में मुख्य रूप से तीन बातें देखी जाएंगी. बच्चे कहां से और किसके जरिए आए, उनके माता-पिता या अभिभावकों की लिखित सहमति है या नहीं, और जो लोग इन बच्चों को लाए हैं, उनकी पृष्ठभूमि क्या है? प्रदेश के सभी 452 पंजीकृत मदरसों में सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा और जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी. मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. जहां भी गड़बड़ी मिली, कार्रवाई होगी,चाहे मदरसा प्रबंधन हो या बच्चों को लाने वाले लोग.
जुलाई से बदल जाएगी पूरी व्यवस्था
यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब प्रदेश में मदरसा शिक्षा की पूरी संरचना बदलने वाली है. मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू किया था. इसके तहत 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. इसके बाद प्रदेश के सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा. सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से मदरसा शिक्षा मुख्यधारा से जुड़ेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी. फिलहाल प्रदेश में 452 पंजीकृत मदरसे चल रहे हैं.
अब देखना यह होगा कि वेरिफिकेशन अभियान में जमीनी हकीकत क्या निकलती है ? और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के दावों में कितना दम है.
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Source: IOCL
























