प्रतापनगर सीट पर हर चुनाव में बदलती है सत्ता, क्या इस बार टूटेगी परंपरा?
प्रतापनगर सीट पर राज्य के गठन के बाद अब तक कुल 5 बार चुनाव हुए हैं. खास बात यह है कि यहां के मतदाताओं ने किसी भी पार्टी को लगातार दूसरा मौका नहीं दिया. बीजेपी-कांग्रेस बारी-बारी से चुनाव जीतती आई हैं.

उत्तराखंड की प्रतापनगर विधानसभा सीट की राजनीति का मिजाज पहाड़ के मौसम जैसा है, कब पलट जाए कहना मुश्किल है. उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद प्रतापनगर सीट पर अब तक 5 बार चुनाव हुए हैं लेकिन यहां के मतदाताओं ने किसी भी पार्टी को लगातार दूसरा मौका नहीं दिया. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी बारी-बारी से जीतती आई हैं. 2027 के चुनाव से पहले भी यही सवाल है कि इस बार पलड़ा किसकी तरफ झुकेगा?
टिहरी गढ़वाल जिले की यह सामान्य सीट टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस सीट पर 85229 मतदाता दर्ज किए गए हैं. यह क्षेत्र पहाड़ी और ग्रामीण है और झील के कारण शेष जिले से कटा हुआ और दूरस्थ माना जाता है. पुल, सड़क और कनेक्टिविटी यहां की सबसे पुरानी मांगें हैं, जो हर चुनाव में उठती हैं.
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पिछले नतीजों पर एक नजर
जानकारी के मुताबिक, 2002 में कांग्रेस के फूल सिंह जीते थे. 2007 में भाजपा के विजय सिंह पंवार ने जीत दर्ज की. साल 2012 में कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी और 2017 में फिर बीजेपी के विजय सिंह पंवार ने चुनाव में जीत दर्ज की. इसी तरह 2022 में फिर विक्रम सिंह नेगी विधायक बने.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 के चुनावी नतीजों में कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी को 19131 वोट मिले, जबकि बीजेपी विजय सिंह पंवार 16790 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. जीत का अंतर मात्र 2341 वोट का था.
निर्दलीय बिगाड़ते हैं खेल
2022 के चुनाव में में निर्दलीय पंकज व्यास ने 4842 वोट यानी 11.31 प्रतिशत का मत हासिल किया इतने बड़े हिस्से का किसी भी तरफ जाना नतीजों को पलट सकता है
कौन हैं संभावित चेहरे
कांग्रेस में मौजूदा विधायक विक्रम सिंह नेगी की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. भाजपा की ओर से पूर्व विधायक विजय सिंह पंवार जिन्हें क्षेत्र में गुड्डू भाई के नाम से जाना जाता है, प्रमुख दावेदार हो सकते हैं. हालांकि किसी भी दल ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट भाजपा की माला राज्य लक्ष्मी शाह ने जीती थी. इस क्षेत्र में शाही परिवार और बहुगुणा परिवार का प्रभाव परंपरागत रूप से रहा है, लेकिन विधानसभा स्तर पर स्थानीय चेहरे ज्यादा असर डालते हैं.
सीट पर सामाजिक समीकरण
अनुमान के मुताबिक, ठाकुर और राजपूत मतदाता सबसे बड़ा वर्ग हैं. इसीलिए दोनों प्रमुख दावेदार इसी समाज से आते हैं. दूसरे नंबर पर ब्राह्मण और उसके बाद अनुसूचित जाति के मतदाता माने जाते हैं. वहीं मुस्लिम आबादी यहां ना के बराबर है. गौरतलब है कि प्रतापनगर विधानसभा सीट किसी भी पार्टी का गढ़ नहीं है बल्कि इस सीट पर हार बार एक नया इम्तहान प्रत्याशियों के लिए होता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रतापनगर की जानता किसको अपना मुखिया चुनती है.
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