उत्तराखंड चुनावः बीजेपी-कांग्रेस या कोई तीसरा? देवप्रयाग सीट का समीकरण
अलकनंदा और भागीरथी का संगम स्थल पर स्थित देवप्रयाग विधानसभा सीट टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यहां कांग्रेस, यूकेडी, निर्दलीय और बीजेपी हर किसी ने बारी-बारी झंडा गाड़ा है.

अलकनंदा और भागीरथी का संगम स्थल पर स्थित देवप्रयाग विधानसभा सीट टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. साल 2002 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आने वाली इस सीट पर विधान सभा चुनाव 2027 के लिए घमासान शुरू हो चुका है.
पहाड़, पूजा और पर्यटन का समीकरण
तीर्थ स्थल होने के नाते यहां तीर्थ पुरोहितों की बड़ी आबादी रहती है. साथ ही ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी बड़ी तादात में है. इस सीट पर राजपूत और ठाकुर समुदाय की मौजूदगी भी कम नहीं है. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि पहाड़ी सीट होने के चलते यहां जातीय ध्रुवीकरण उतना हावी नहीं होता जितना कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि को माना जा सकता है.
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साल 2022 के विधानसभा चुनाव में देवप्रयाग में कुल 87,719 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से करीब 48 हजार लोगों यानी 54.71 फीसदी ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. दिलचस्प यह है कि सीट के गठन के बाद से मतदाताओं की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है.
पिछले आंकड़ों पर एक नजर
देवप्रयाग की सबसे बड़ी खासियत यही रही है कि इस सीट पर किसी दल का स्थायी किला नहीं है. 2002 में कांग्रेस का टिकट लेकर मंत्री प्रसाद नैथानी ने महज 2,252 वोटों के अंतर से बाजी मारी थी. साल 2007 के चुनाव में यह हवा बदली और उत्तराखंड क्रांति दल के दिवाकर भट्ट ने भारी 11,595 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया.
इसी तरह 2012 के चुनाव में मंत्री प्रसाद नैथानी को कांग्रेस का टिकट नहीं दिया. मंत्री प्रसाद नैथानी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतर गए और 1541 वोटों के अंतर से विधायक चुने गए. 2017 के चुनाव से भाजपा की इस सीट पर पकड़ है. भाजपा के विनोद कंडारी ने 2017 के चुनाव में 3,499 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. 2022 में भी उन्होंने अपनी सीट बचाए रखी. हालांकि जीत का मार्जिन घटकर 2,588 वोट रह गया.
बीजेपी के लिए नहीं आसान होगी जीत
आंकड़ों पर गौर करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि देवप्रयाग एक क्लासिक स्विंग सीट है जहां कांग्रेस, यूकेडी, निर्दलीय और बीजेपी हर किसी ने बारी-बारी झंडा गाड़ा है. इतना जरूर है कि 2017 और 2022 की लगातार दो जीत के बाद यह सीट फिलहाल बीजेपी की तरफ झुकी नजर आ रही है. हालांकि वोटों में घटता हुआ जीत का अंतर इस बात की ओर भी इशारा करता है भाजपा के लिए अगला मुकाबला आसान नहीं होगा.
2027 में कौन कौन दावेदार
साल 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक किसी भी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. हालांकि बीजेपी की ओर से मौजूदा विधायक विनोद कंडारी की हैट्रिक की कोशिश तय मानी जा रही है. कांग्रेस खेमे में एक बार फिर मंत्री प्रसाद नैथानी या किसी नए चेहरे पर दांव खेलने की चर्चा है.
कांग्रेस से प्रताप भंडारी भी इस सीट के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट में शामिल हैं. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस की ओर से यह टिकट भंडारी को दिया जाना है. यूकेडी के मज़बूत नेता और उत्तराखंड के फील्ड मार्शल कहे जाने वाले दिवाकर भट्ट के निधन के बाद यूकेडी इस सीट पर कमजोर पड़ सकती है. हालांकि चुनाव का रुझान क्या होगा यह तो जानता ही तय करेगी.
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