चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, अब तक 205 लोगों की गई जान
Uttarakhand News: उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने इस बार चारधाम यात्रा, प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा पेश किया है.

उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से शुक्रवार को चारधाम यात्रा, प्राकृतिक आपदा, सड़क दुर्घटनाओं और मौसम से जुड़े आंकड़ों का पूरा खाका सामने आया है. जिसमें 27 जून की सुबह 10 बजे तक यात्रा मार्गों पर 205 तीर्थयात्रियों की जान जा चुकी है, जिनमें से तीन की मौत स्वास्थ्य कारणों व अन्य वजहों से हुई. इनमें चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के मौत के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.
चारधाम यात्रा में इतने श्रद्धालुओं की मौत
आंकड़ों पर गौर करें तो 22 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में अब तक 8,056 वाहन और 13,37,544 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, जिनमें 94 यात्रियों की मौत, तीन के घायल होने और एक के लापता होने की सूचना है. वहीं 23 अप्रैल से शुरू बद्रीनाथ धाम में सबसे अधिक 18,288 वाहन और 13 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे. जहां 64 लोगों की मौत हुई है.यमुनोत्री (जानकीचट्टी) में 26 और गंगोत्री में 18 यात्रियों की जान गई है.
1 अप्रैल 2026 से अब तक की प्राकृतिक आपदा रिपोर्ट के अनुसार राज्यभर में 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 23 लोग घायल हुए हैं. इनमें से गौर करने वाली बात यह है कि मृतकों में से 8 और घायलों में से 4 लोग वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में प्रभावित हुए. चमोली जिले में पशुओं के नुकसान का आंकड़ा सबसे चिंताजनक रहा, जहां 413 छोटे पशु प्रभावित हुए. कुल मिलाकर प्रदेश में 469 छोटे और 9 बड़े पशुओं की हानि हुई है, जबकि 7 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.
सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा डराने वाला
1 जनवरी 2026 से अब तक की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट और भी गंभीर तस्वीर पेश करती है. इस अवधि में प्रदेश में 172 लोगों की मौत हो चुकी है, 651 लोग घायल हुए हैं और 5 लोग लापता हैं. टिहरी जिला इस मामले में सबसे आगे है जहां 33 मौतें दर्ज हुई हैं. उसके बाद पिथौरागढ़ में 22 और अल्मोड़ा-चमोली में 18-18 मौतें हुई हैं.
जिलों से मिली ताजा सूचनाओं में चमोली जिले की घटना उल्लेखनीय है. 26 जून की सुबह करीब एक बजे नारायणबगड़ तहसील के केवरतल्ला गांव में अतिवृष्टि के चलते नारायणबगड़ बाजार में मलबा आ गया, जिससे 10-12 दोपहिया-चौपहिया वाहन मलबे में फंस गए और 8-10 दुकानों में मलबा घुस गया. इसके अलावा उत्तरकाशी में बड़कोट तहसील के खांड गांव में भी 26 जून आग लगने की घटना सामने आई.
मौसम विभाग ने भी दिया बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग मुताबिक़ दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज, मोतिहारी से होकर गुजर रही है, और आने वाले 3-4 दिनों में मानसून के उत्तराखंड के कुछ हिस्सों तक पहुंचने के अनुकूल हालात बने हुए हैं.
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विभाग ने 27 से 29 जून तक पहाड़ी जिलों में गर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं तेज झोंकेदार हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) की चेतावनी दी है. साथ ही 30 जून को पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश तथा 1 जुलाई को नैनीताल, चंपावत, देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है. संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन से भी लोगों को सावधान रहने को कहा गया है.
हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जैसे मैदानी जिलों में अभी शुष्क मौसम बना रहने का अनुमान है. लेकिन, तापमान में अगले 4-5 दिनों के बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना जताई गई है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस महानिरीक्षकों और संबंधित विभागों को सतर्क रहने और मार्गों को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए हैं.
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