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UP Election 2022: पिछले 17 चुनावों का रोचक इतिहास, Kasganj में जिस दल का प्रत्याशी जीता उसी की बनी सरकार

UP Election: कासगंज (Kasganj) सदर विधानसभा सीट पर पिछले 17 चुनावों का बड़ा रोचक इतिहास रहा है. इन 17 चुनावों में 14 चुनाव ऐसे रहे हैं कि जिस दल का प्रत्याशी जीता उसी दल की सरकार बनी है.

UP Assembly Election 2022: कासगंज (Kasganj) सदर विधानसभा सीट पर पिछले 17 चुनावों का बड़ा रोचक इतिहास रहा है. इन 17 चुनावों में 14 चुनाव ऐसे रहे हैं कि जिस दल का प्रत्याशी इन 14 चुनावों में जीता है तो उस दल की सरकार ही सत्ता में आई है. केवल तीन चुनावों में ही अपवाद स्वरूप परिणाम रहा है. जब जीते हुए विधायकों की सरकार नहीं गठित हुई, लेकिन पिछले 43 वर्षों से यह मिथक लगातार जारी है. इस बार के चुनाव में क्या यह मिथक साबित होगा, ये यह भविष्य के गर्भ में छिपा है.

लगातार चार बार कांग्रेस
कासगंज किंग बनाने में हमेशा माहिर रहा है. बात 1952 से शुरू करते हैं 1952 में कांग्रेस (Congress) के बाबूराम गुप्ता (Baburam Gupta) चुनाव जीते तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. पंडित गोविंद बल्लभ पंत (Govind Ballabh Pant) कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री बने. 1957 कांग्रेस के कालीचरन अग्रवाल चुनाव जीते और कांग्रेस की सरकार चंद्रभान गुप्ता (Chandrabhan gupta) के नेतृत्व में गठित हुई. 1962 में जनसंघ के गिरिवर प्रसाद चुनाव जीते, लेकिन कांग्रेस की सरकार सुचेता कृपलानी (Sucheta Kripalani) के नेतृत्व में सरकार गठित हुई. 1967 में कांग्रेस के कालीचरन अग्रवाल चुनाव जीतो तो फिर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी.

1969 रहा अपवाद
1969 का चुनाव फिर अपवाद बना. यहां से जनसंघ के नेतराम सिंह (Netram Singh) चुनाव जीते लेकिन सरकार कांग्रेस की बनी. यह सरकार ज्यादा नहीं चली और चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) बागी हुए. जनसंघ (Bharatiya Jana Sangh) के नेतराम के समर्थन से लखनऊ (Lucknow) में बीकेडी की सरकार बनी. मतलब कासगंज के इस मिथक को फिर से हवा मिली और जो कासगंज सदर से जीता उस विधायक की जरूरत पड़ गई. अगला चुनाव 1974 में हुआ और इस चुनाव में कांग्रेस से मैदान में उतरे मानपाल को जीत मिली, तो सरकार कांग्रेस की बनी और हेमवतीनंदन बहुगुणा (Hemwati Nandan Bahuguna) मुख्यमंत्री बने.

नेतराम सिंह रहा वर्चस्व
1977 में कासगंज सीट से जनता पार्टी (Janta Party) से नेतराम सिंह जीते तो मुख्यमंत्री रामनरेश यादव (Ram Naresh Yadav) के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी थी. 1980 में कांग्रेस के मानपाल सिंह जीते तो प्रदेश में विश्वनाथ प्रताप सिंह (Vishwanath Pratap Singh) के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी. 1985 में कांग्रेस से फिर मानपाल सिंह जीते और फिर से कांग्रेस की सरकार बनी. 1989 में जनता दल के गोवर्धन सिंह विधायक बने तो मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी. 1991 में बीजेपी के नेतराम सिंह जीते तो कल्याण सिंह (Kalyan Singh) के नेतृत्व में बीजेपी (BJP) की सरकार बनी.

1993 में हुआ ऐसा
1993 में बीजेपी से कल्याण सिंह चुनाव जीते लेकिन सरकार सपा-बसपा की गठबंधन की सरकार बनी. 1996 के चुनावों में बीजेपी के नेतराम जीते तो बीजेपी-बसपा की साझा सरकार बनी. 2002 में मानपाल सिंह सपा से जीते तो प्रदेश में सपा की सरकार बनी. 2007 में बसपा के हसरत उल्ला खां शेरवानी चुनाव जीते तो सूबे की सत्ता पर बसपा काबिज हुई. 2012 में फिर सपा से मानपाल सिंह चुनाव जीते तो प्रदेश में सपा की सरकार बनी. 2017 में बीजेपी के देवेंद्र राजपूत यहां से चुनाव जीते और बीजेपी के योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में सरकार बनी. यह मिथक पिछले चुनावों में देखने में सामने आया है. अब देखने वाली बात ये होगी क्या कासगंज सदस्य जुड़ा है. यह दस्तूर-बदस्तूर जारी रहेगा या फिर यह मिथक इस चुनाव में टूटेगा.

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