KGBV की बच्चियों को किलानुमा सुरक्षा कवच दे रही है योगी सरकार, अब सब कुछ कैमरे में होगा कैद
Lucknow News: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, हमारी सरकार चाहती है कि हर बेटी निडर होकर पढ़े और आगे बढ़े. किलानुमा सुरक्षा व्यवस्था से उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य की बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में पढ़ने वाली करीब 1 लाख 10 हजार छात्राओं के लिए सरकार अब ‘किलानुमा’ सुरक्षा कवच तैयार करवा रही है. इसके तहत 746 केजीबीवी विद्यालयों की चारों ओर 8 फीट ऊँची और 9 इंच मोटी बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है, जिस पर ढाई मीटर ऊपर तक कंटीले तार भी लगाए जा रहे हैं. इसके साथ ही पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाकर 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की जा रही है.
कुल 161 करोड़ रुपये की इस योजना में से 121 करोड़ रुपये बाउंड्री वॉल और तार पर और 40 करोड़ रुपये सीसीटीवी नेटवर्क पर खर्च किए जा रहे हैं. इस योजना का संचालन लखनऊ स्थित एक आधुनिक कंट्रोल रूम से किया जाएगा. यहां से हर स्कूल की निगरानी होगी, मिड-डे मील, क्लासरूम टीचिंग, सफाई व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा तक सब कुछ कैमरे में कैद होगा.
सरकार का कहना है कि इससे बेटियों की सुरक्षा तो मजबूत होगी ही. इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी. इस निगरानी तंत्र से शिक्षिकाओं, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों की हर गतिविधि पर नजर रहेगी. अधिकारी भी निरीक्षण के दौरान अब कोई लापरवाही नहीं कर पाएंगे.
हर बेटी निडर होकर पढ़े और आगे बढ़े
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, “हमारी सरकार चाहती है कि हर बेटी निडर होकर पढ़े और आगे बढ़े. ‘किलानुमा’ सुरक्षा व्यवस्था से उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.”
2004 में शुरू हुई थी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2004 में की थी. इसका मकसद ग्राम्य और पिछड़े इलाकों की लड़कियों को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा देना है. यूपी में इन विद्यालयों की संख्या लगातार बढ़ी है और अब योगी सरकार इसमें सुरक्षा और गुणवत्ता को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है.
युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है काम
सरकार का लक्ष्य है कि यह योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 में पूरी तरह लागू हो जाए, काम युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है. ये पहली बार है जब सरकार ने इन स्कूलों को सेना जैसे सुरक्षा घेरे में बदलने का निर्णय लिया है, जिससे बच्चियां पूरी तरह सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें. सरकार की यह पहल राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर मजबूत संदेश देती है. ये पहल न केवल भौतिक सुरक्षा बल्कि मनोवैज्ञानिक सुरक्षा भी प्रदान करेगी, जिससे बच्चियां खुलकर पढ़ें और आगे बढ़ें.
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