Etawah में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल, 10 डॉक्टरों के ट्रांसफर के बाद मरीजों को संभालना हुआ मुश्किल
Etawah News: इटावा में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा है. जनपद में 10 डॉक्टर्स के ट्रांसफर होने के बाद हालत और खराब हो गई है.

Etawah News: इटावा में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) का बुरा हाल हो गया है. पहले से डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे जनपद में 10 डॉक्टर्स के ट्रांसफर (Doctors Transfer) होने के बाद सिस्टम और भी ज्यादा गड़बड़ा गया है. सीएमओ (CMO) की मानें तो जनपद में 80 डॉक्टरों की जरुरत है जबकि वर्तमान में केवल 35 डॉक्टर्स ही मौजूद हैं, जो किसी तरह से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाल रहे हैं. जिला अस्पताल की हालत ये है कि मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता है.
इटावा में स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल
पहले से ही डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जिला अस्पताल में आनन-फानन में सरकार की तरफ से 10 डॉक्टर्स का ट्रांसफर गैर जनपदों में कर दिया गया. जिसमें लेवल 1 के 3 डॉक्टर, लेवल 2 के 4 डॉक्टर एवं लेवल 3 के 3 डॉक्टर शामिल हैं. ट्रांसफर से पहले 2000 ओपीडी करने वाले जिला अस्पताल को मात्र 30% डॉक्टर ही चला रहे थे. उस पर 10 डॉक्टर्स का ट्रांसफर समझ से परे है. डॉक्टर्स की कमी के चलते जहां सामान्य बीमारियों का इलाज करने के लिए वर्तमान में मौजूद डॉक्टर को लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं वही इस बीच अगर कोई इमरजेंसी केस आ जाता है तो मरीजों के तीमारदारों के साथ ही डॉक्टर्स की भी सांस फूलने लगती है.
डॉक्टरों के ट्रांसफर से और बढ़ी मुसीबत
जनपद में डॉक्टरों की कमी को लेकर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी भगवान दास भैरोरिया से बात की गई तो सीएमओ साहब ने भी इस बात को स्वीकार किया कि यहां पर डॉक्टरों की कमी है बस किसी तरह मैनेज किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक सीएमओ साहब ऐसे ही मैनेज करते रहेंगे. इस समय इटावा की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे बनी हुई हैं. बात यहीं खत्म नहीं होती, यहां की हालत जाने बगैर ही यहां से दस डॉक्टरों का ट्रांसफर भी दूसरे जनपदों में कर दिया गया, जिसका खामियाजा अब लोगों को उठाना पड़ रहा है.
सीएमओ के मुताबिक इटावा जैसे जिले में कम से कम अभी 80 और सरकारी डॉक्टर्स की जरूरत है वहीं जिला अस्पताल में जहां प्रतिदिन दो हजार ओपीडी हो रही है ऐसे में जिला अस्पताल में भी डॉक्टर्स की बेहद जरूरत है. बसपा शासनकाल में शहर के बीचों-बीच बना मेडिकल केयर यूनिट अस्पताल भी राजनीति की भेंट चढ़ चुका है. सपा शासनकाल गुजर जाने के बाद बीजेपी शासन के भी पांच साल गुजर गए लेकिन अभी तक मेडिकल केयर यूनिट चालू नहीं हो सका है. यहां भी सरकार की तरफ से अभी तक स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है
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Source: IOCL
























