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UP बोर्ड का छात्रों के हित में बड़ा कदम, सिर्फ अधिकृत किताबों से होगी पढ़ाई, आर्थिक बोझ होगा कम

UP Board News: यूपी बोर्ड ने सत्र 2026-27 के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब सभी स्कूलों में केवल अधिकृत किताबों से पढ़ाई होगी और अनधिकृत गाइड व महंगी पुस्तकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सस्ती बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. माध्यमिक शिक्षा परिषद ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि अब सत्र 2026-27 से सभी स्कूलों में केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी. अनधिकृत किताबों और गाइड पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

परिषद के अनुसार, कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और गाइड छात्रों पर थोपी जा रही थीं. ये किताबें परिषदीय पुस्तकों से 149% से लेकर 361% तक महंगी पाई गईं. इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था.

अब ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई होगी. यदि कोई स्कूल या शिक्षक छात्रों को अनधिकृत किताबें खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.

कक्षा 9-10 के लिए अनिवार्य किताबें

नई व्यवस्था के तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं. साथ ही सामाजिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की भी अधिकृत पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी.इन किताबों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है ताकि हर छात्र आसानी से पढ़ाई कर सके.

इंटरमीडिएट स्तर यानी कक्षा 11 और 12 के लिए कुल 36 विषयों की अधिकृत किताबें लागू की गई हैं. इसमें विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों वर्गों के सभी प्रमुख विषय शामिल हैं.

भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृह विज्ञान जैसे विषयों की तय किताबें ही पढ़ाई जाएंगी.

एनसीईआरटी की 70 किताबें लागू

राज्यभर में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की लगभग 70 किताबों को लागू किया गया है. इसके अलावा हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 चयनित पुस्तकें भी शामिल की गई हैं. इसका उद्देश्य है कि पूरे प्रदेश में एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सके.

सभी स्कूलों पर लागू होंगे नियम

यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है. बल्कि राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी (स्ववित्त पोषित) सभी स्कूलों को इसका पालन करना होगा. परिषद ने साफ कहा है कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

परिषद ने निर्देश दिया है कि 15 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर स्कूलों का निरीक्षण किया जाए. जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे लगातार निगरानी करें और नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं. जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां तुरंत कार्रवाई होगी.

छात्रों और अभिभावकों की मदद के लिए परिषद ने असली किताब पहचानने का तरीका भी बताया है. हर अधिकृत किताब के कवर पेज पर 7 अंकों का अल्ट्रा वायलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर होगा. जिस किताब पर यह नंबर नहीं होगा, उसे अनधिकृत माना जाएगा.

पाइरेसी और नकली किताबों पर भी कार्रवाई

किताबों की कॉपीराइट सुरक्षा को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है. अगर कोई प्रकाशक या दुकानदार नकली किताबें छापता या बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी. कॉपीराइट एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया जा सकता है.

अभिभावकों और छात्रों को जागरूक करने के लिए 15 अप्रैल तक सभी जिलों में पुस्तक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे. इन शिविरों में अधिकृत प्रकाशकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि सही किताबें सीधे छात्रों तक पहुंच सकें.

इस पूरे अभियान का मकसद साफ है, छात्रों को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता की किताबें उपलब्ध कराना. परिषद का मानना है कि इससे न सिर्फ अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.

यूपी बोर्ड का यह फैसला छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. अब मनमानी किताबों की जगह एक तय और सस्ती व्यवस्था लागू होगी. अगर इसका सही तरीके से पालन हुआ, तो प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है.

तीन एजेंसियों को मिली जिम्मेदारी

किताबों की छपाई और वितरण के लिए तीन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है. इसमें  पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीताम्बरा बुक्स (झांसी), सिंघल एजेंसीज (लखनऊ). इनके जरिए ही किताबें छात्रों तक पहुंचेंगी.

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